24hnbc
अभी तो त्योहारों की शुरुआत है, यदि यही हाल रहा तो शहर में कैसे कायम होगा अमन और चैन
- By 24hnbc --
- Saturday, 29 Aug, 2026
24hnbc.com
बिलासपुर, 29 अगस्त 2026।
अगस्त और सितंबर माह जिन्हें सावन और भादो भी कहा जा सकता है में त्योहारों की भरमार है। ईद मिलाद-उन-नबी, रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, गणेश ऐसे में प्रशासन और आम नागरिकों की जागरूकता ही हमको जलने से बचा सकती है। अन्य किसी से उम्मीद न करें क्योंकि जिन्हें अपने विभाजन की आंच पर रोटी सीखनी है वे तो निकल पड़े हैं अशांति फैलाने... 28 अगस्त जब रक्षाबंधन का त्यौहार जब समाप्ति की ओर था तब बिलासपुर के एक चर्चित एक्टिविस्ट अपने प्रतिद्वंदी के मोहल्ले में भीड़ लेकर पहुंच गये। यहां यह जानना जरूरी है कि दोनों फसादि हैं और जेल की रोटियां तोड़ चुके हैं। दोनों के अपने स्वार्थ हैं जिन्हें पूरा करने के लिए वे टिक्रम में लगे रहते हैं। खपरगंज सिटी कोतवाली क्षेत्र का अर्धव्यावसायिक क्षेत्र है। कबाड़ व्यवसाय, होटलें, रद्दी की दुकान के साथ यहां एक ऐसी बिरादरी की मस्जिद भी है जिन्हें किसी राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है और इस मस्जिद को हम बोहरा समाज की मस्जिद के नाम से जानते हैं। कल जब एक गुट विशेष की भीड़ एकत्र हुई तो भीड़ में बिना सोचे समझे व्यावसायिक स्थल पर हमला किया। दूसरा पक्षी जब तक जवाब देने एकत्र होता पहला पक्ष स्वयं सही साबित करने कोतवाली थाना के शरण में आ गया। यह तरीका उन लोगों का है जो पुलिस के तरीके जानते हैं और जिन्हें विधि का ज्ञान है। थाने में दोनों पक्षों की भीड़ लग गई और सोशल मीडिया पर तथ्यहीन सूचनाएं फैलने लगी। पुलिस प्रशासन, जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके की नजाकत को समझते हुए त्वरित और धैर्य पूर्वक कार्यवाही की। अभी इस थाना क्षेत्र के इस हिस्से में धारा 144 लगी है पर्याप्त संख्या में पुलिस बल कायनात है और जनजीवन सामान्य है।
इसके बावजूद कुछ प्रश्न उठना स्वाभाविक है। पुलिस के खुफिया तंत्र से ज्यादा सक्रिय एक गुट का तंत्र कैसे हो सकता है। सैकड़ो की संख्या में युवा किसी मोहल्ले में एकत्र हो और अशांति फैलाने के नियत से एकत्र हो तो खबरें पहले क्यों नहीं लगी। दूसरा सत्यम चौक से मध्य नगरी चौक के बीच तीन दिनों से तकरीर चल रही है। और इसके पड़ोसी क्षेत्र में ही यह विवाद हुआ। तीसरा ईद के पर्व के पूर्व शांति समिति की बैठक हुई थी। तब इस बैठक में जिन भी बिंदुओं पर विचार किया गया उनका पालन हुआ या नहीं, क्योंकि अभी तो बहुत से त्योहार बाकी है। और आखरी बात आम जनता के वोट से जो नेता जीत कर सम्मानित जनप्रतिनिधि बनते हैं वे ऐसे मैको पर कहां गायब हो जाते हैं। कहते तो यह है कि जनप्रतिनिधि का जनता से सीधा रिश्ता होता है और जनता उनकी बात को मानती है तो जब कभी भी किसी भी क्षेत्र में तनाव होता है तो जनप्रतिनिधियों को जिला प्रशासन के पहले मोर्चा लेना चाहिए। आखिर पुलिस को दंडा चलाने की जरूरत ही क्यों पड़े।


