दावेदारों ने शुरू कर दी है सक्रियता
जिले की तीन विधानसभा सीट पर भाजपा बदलेगी प्रत्याशी
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बिलासपुर, 27 अगस्त 2026।
छत्तीसगढ़ राज्य में विधानसभा चुनाव 2023 में भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव जीतने के लिए जो रणनीति बनाई थी उससे हटकर इस बार कुछ नए प्रयोग हो सकते हैं। 90 विधानसभा सीट वाली छत्तीसगढ़ राज्य की बिलासपुर जिला में विधानसभा की 6 सीट है। एक रिजर्व मस्तूरी और एक सामान्य कोटा को छोड़कर सब पर भारतीय जनता पार्टी का कब्जा है। प्रत्याशी चयन के मामले में इस बार कांग्रेस से कहीं ज्यादा कठिनाई भाजपा खेमे में होने वाली है। पिछले कुछ महीने से बिलासपुर प्रेस क्लब में अभ्यागतों का कार्यक्रम चल रहा है। और इस कार्यक्रम में बिल्हा विधायक धरमलाल, बिलासपुर विधायक अमर अग्रवाल, बेल्थरा विधायक सुशांत शुक्ला, अभ्यागत बन चुके हैं। जो बातें बाहर हाल में होती है उससे हटकर अंदर कुछ और भी होता है। जिससे लगता है कि जिले के दो विधायकों को यह समझ आ चुका है कि इस बार उन्हें उन्हें टिकट नहीं मिल सकता, ऐसे में दो रास्ते बचते हैं पर पूर्वक विदाई और दूसरा अपने पुत्र पुत्री या पत्नी के लिए टिकट की व्यवस्था।
बिलासपुर में यह प्रयोग नहीं होगा पर बिल्हा विधायक अपने पुत्र के लिए राजनीतिक मैदान सजाने में कई साल से लगे हैं। उनका बेटा डॉक्टर है, एमबीबीएस डॉक्टर है तो उच्च शिक्षित और व्यावसायिक शिक्षा वह भी सेवा क्षेत्र की श्रेष्ठ श्रेणी में लाकर खड़ा करती है पर ऐसा कभी सुनने में नहीं आया की डॉक्टर साहब जिस विद्या में महारत रखते हैं उसमें उन्होंने कोई सक्रियता दिखाई हो... ऐसे में उन्हें राजनीति में डॉक्टर होने का कोई लाभ प्राप्त नहीं होता। ऐसा लाभ भारतीय जनता पार्टी में कई ने प्राप्त किया। बिल्हा की राजनीति में वर्तमान विधायक धरमलाल कौशिक के उन्हीं की पार्टी में प्रतिस्पर्धी बहुत हैं और यह प्रतिस्पर्धा छुपी और खुली दोनों तरह की है ऐसे में वर्ष 2023 के दौरान जब वे स्वयं टिकट के लिए प्रयास रखते थे तब से राजनीतिक समीकरण बनते बिगड़ते दिखते थे।
छत्तीसगढ़ में भाजपा की कमान जिनके हाथों में थी उन्होंने प्रत्याशी चयन में कुछ ऐसा फार्मूला भी अपनाया था जिसकी चर्चा दबे स्वर में होती थी और यह फार्मूला 90 सीटों में से बिलासपुर जिले में भी अपनाया गया था। दो विधानसभा सीट उसे फार्मूले को लेकर विशेष चर्चा में थी बिलासपुर और बिल्हा चुनाव परिणाम में इन दोनों विधानसभा सीटों पर स्थापित विधायक समर्थकों के अंदर खुशी भर दी थी। उन्हें लगता था कि मंत्री पद तो तय है मुख्यमंत्री भी बन सकते हैं पर हाई कमान का डंडा ऐसा चला कि मंत्री पद भी नसीब नहीं हुआ और चर्चा में बना रहने के लिए जतन करना पड़ता है। अब तो आधा कार्यकाल भी सरकार का बीत गया और काम की समीक्षा शुरू हो गई। टिकट के दावेदार जोर-शोर से हो रहे हैं। तखतपुर विधानसभा में भी इस बार भारतीय जनता पार्टी अपना उम्मीदवार बदलेगी ही... राष्ट्रीय राजनीतिक परिदृश्य जिस तरह से चल रहा है उससे लगता है कि इस बार हिंदी पट्टी के तीन राज्य छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में एचएम का यह जुमला कि मैं तो सरकार बन रहा हूं आप चौराहों पर सक्रिय दिखे फिट नहीं होने वाला।


