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प्रदेश की बड़ी आबादी हुई उपेक्षा की शिकार

 

 

24HNBC केंद्रीय बजट में आम लोगों के लिए कई बड़ी घोषणाओं के बाद भी प्रदेश की बड़ी आबादी ठगी महसूस कर रही है। छह जिला मुख्यालयों को रेल नेटवर्क से जोड़ने की उम्मीद इस बार भी पूरी नहीं हो सकी। गुमला, सिमडेगा, खूंटी, चतरा, गोड्डा और सरायकेला-खरसावां जिलों के मुख्यालय रेललाइन से नहीं जुड़े हैं। यहां के बाशिंदों ने इस बार उम्मीद लगा रखी थी कि उन्हें ट्रेन पकड़ने के लिए दूसरे शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा, परंतु हर साल की तरह इस बार भी उनके भरोसे को चोट पहुंची है।80 साल पहले तैयार बरवाडीह-चिरमिरी रेल लाइन पर भी ट्रेन चलने की आशा बजट प्रस्तुत होने के बाद निराशा में बदल गई। इस रेललाइन पर ट्रेन चलने से कोलकाता से मुंबई की दूरी कम से कम 400 किलोमीटर कम हो जाती। प्रदेश के लोगों को एक वैकल्पिक रेलमार्ग भी मिलता। अंग्रेजों ने इसी को ध्यान में रखकर इस रेललाइन को तैयार कराया था, परंतु आजाद भारत की सरकारें बार-बार आश्वासन के बाद भी उस पर ट्रेन नहीं चला सकी।केंद्र सरकार से झारखंड के लिए किसी बड़े सार्वजनिक उपक्रम की स्थापना की आस भी अधूरी रह गई। अगर केंद्र सरकार झारखंड के खनिज संसाधनों पर आधारित किसी बड़े सार्वजनिक उपक्रम की स्थापना की घोषणा करती है तो प्रदेश के हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा।