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आप खा लो चढ़ावे की रकम, हम कह रहे हैं सीताराम

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बिलासपुर, 8 जून 2026।
हम 12 वर्षों में क्या से क्या बन गए नागरिक से लाभार्थी और लाभार्थी से भोक्ता फिर कॉकरोच वैश्विक पर्यटन में थाईलैंड, वियतनाम जैसे देशों में भी यह होर्डिंग लगा है नो स्मोकिंग, नो इंडियन आखिर हमने अपनी क्या प्रजाति बनाई या हम यह समझे कि हमें ऐसा बनाया गया है। 2014 से पहले भारत के लोग काम के थे। आईटी के धंधे में डॉलर कमा रहे थे दुनिया के देशों में काम कर के भारत में डॉलर भेजते थे तब कोई पाकिस्तान का नाम लेवा नहीं था। अब भारत का नाम लेवा नहीं है। प्रधानमंत्री मोदी ने 125 -130 करोड लोगों को मुफ्तखोर, लाभार्थी, भूखमरा, परजीवी और आश्रित आबादी बनाने का महा अभियान चलाया। नोटबंदी करके एक आदमी को कतार में खड़ा किया। सरकार लोगों के खातों में 500, 1000, 2000 रूपए का धरर्मदा देती है। मतलब 145 करोड लोग काम के न काज के डाटा खाते हैं। रील बनाते हैं और दिन काटते हैं। फर्जी डिग्रियों की जैसी भरमार हमारे देश में है कहीं नहीं होगी... यह हमारी व्यवस्था है कि कांवरियों पर फूल बरसाते हैं और जब बेरोजगार अपनी परीक्षा की प्रदर्शित किए लिए सड़क पर आते हैं तो उनकी पीठ पर लाठी बरसते हैं। किस सड़क पर आते हैं तो उन्हें देशद्रोही कहते हैं और उनके मार्ग में कील बिछाते हैं। श्रमिक जब आंदोलन करते हैं तो उनके पाकिस्तानी कनेक्शन ढूंढ लेते हैं पर जब कॉकरोच आंदोलन करने आता है और उसकी प्रेस कॉन्फ्रेंस कांस्टीट्यूशनल क्लब में होती है तो उसे संसद को नहीं ढूंढे थे जिसने बुक कराई क्योंकि कांस्टीट्यूशनल क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस की बुकिंग सांसद के नाम से ही हो सकती है।
सरकार को पूर्ण बहुमत नहीं मिला है अर्थात विपक्ष मजबूत है तब भी गोदी मीडिया यह पूछता है विपक्ष है कहां... जब संसद में संविधान संशोधन बिल गिरा तो क्या बिल कॉकरोच ने गिराया था उसे दिन संसद में विपक्ष ही था। सरकार ने नया तरीका चुना। मत देकर जो सरकार बदलते थे सरकार ने मतदाता ही बदल दिया। मतदाता उनकी पसंद का और विपक्ष भी उन्हीं की पसंद का, मात्र चार दिन पूर्व पश्चिम बंगाल में विपक्षी दल टीएमसी को तोडा ही इसलिए गया की विपक्ष का नेता भी सत्ता की मर्जी से बनेगा। ऐसे में वे लोग जिन्होंने देश में हालातो को नहीं झेला वे कुछ घंटे के लिए मातृभूमि पर आएंगे जंतर मंतर पर आंदोलन करेंगे और मीडिया उन्हें लेकर विदा कर देगी। जिन्होंने यहां झेला भले ही वे किसान हो, श्रमिक हो, बेरोजगार हो, छात्र हो या मणिपुर की महिलाएं हो, हरियाणा के पहलवान हो उन सबको विरोध की आवाज नहीं माना जाएगा। विरोध की आवाज तो अमेरिका से आएगी अर्थात हमारा प्रधान सेवक क्या करेगा यह भी अमेरिका तय करेगा और विरोध कौन करेगा यह भी अमेरिका तय करेगा और हमारे पास एक काम बचेगा सीताराम कहिए.... और उसे मंदिर में वहां के मठाधीश चढ़ावे की रकम भी डकार जाएंगे और हमसे कहलाएंगे सीताराम।