24hnbc
बोरे बासी एक दिन, दारु रोज
- By 24hnbc --
- Sunday, 03 May, 2026
24hnbc.com
बिलासपुर,4 मई 2026।
1 मई को पूरे देश के साथ छत्तीसगढ़ में भी मजदूर दिवस मनाया। कई स्थानों पर स्थानीय व्यंजन बोरे बासी खाकर ऐसा बताया गया कि, प्रदेश का मालदार नेता प्रदेश के खस्ता हाल श्रमिकों के साथ खड़ा है और इसी तारीख से प्रदेश की भाजपा सरकार का 40 दिवसीय सुशासन त्यौहार प्रारंभ हुआ है। अच्छा हुआ सुशासन अप्रैल महीने में नहीं मनाया गया। हम विशेष तौर पर अप्रैल महीने की बात क्यों कर रहे हैं इसलिए की 22 अप्रैल को प्रदेश में 24 घंटे के भीतर 41 करोड़ 75 लाख रुपए की शराब गटक ली गई। दारु पीने की परंपरा में प्रदेश की राजधानी रायपुर ने सब जिले को पीछे धकेलते हुए एक दिन में 7.39 करोड़ की शराब पीकर अपना परचम लहरा दिया। हालांकि न्यायधानी ने नाक कटा दी और मात्र 3.7 1 करोड़ की ही शराब पी पाए। विशेषज्ञ कह सकते हैं कि खाड़ी युद्ध के टेंशन ने छत्तीसगढ़िया सबसे बढ़िया अवसाद में डाल दिया है और प्रदेशवासी उड़ता पंजाब के स्थान पर डूबता छत्तीसगढ़ के आदर्श को बुलंद कर रहे हैं। एक समय छत्तीसगढ़ की राजनीति में शराब बंदी मुख्य मुद्दा हुआ करता था। और इस घोषणा पत्र में स्थान दिया जाता था। पर यह गए जमाने की बात है अब तो दारू बेचने और पीने के नए-नए आंकड़े आ रहे हैं। दुर्ग ने 5.09 करोड़ की दारू पी, छोटे जिले भी पीछे नहीं है। कोरिया जिला जो विकास में भले ही पीछे हो पर दारू की खपत में आगे है। यहां दारू बिक्री में पिछले वर्ष की तुलना में 78.4% की बढ़ोतरी की इसी तरह नक्सली मुक्त होने के बाद सुकमा 74% बढ़ोतरी, सूरजपुर 65.9% वृद्धि के साथ सरकारी आय में कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं।
22 अप्रैल तक के आंकड़ों के मुताबिक अभी छत्तीसगढ़ में 8 अरब 66 करोड रुपए की शराब बेची है। हमने बनाया है हम ही सवारेंगे के नारे के साथ भारतीय जनता पार्टी का डबल इंजन सुशासन शराब बिक्री में साय साय करते आगे बढ़ रहा है। एक तरफ ईडी आबकारी घोटाले में रकमों का रोज नया हिसाब देती है। वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ की जनता दारू पीकर छत्तीसगढ़ सरकार के खजाने को लोकहित के लिए भर रही है। बताया जाता है कि प्रदेश में कुछ वर्ग विशेष को लोकल होममेड दारू बनाने की स्वतंत्रता दी गई है। निजी स्तर पर कितनी दारू बनती है इसका कोई अधिकृत आंकड़ा नहीं है। लेकिन जो आंकड़े उपलब्ध है ये वो आंकड़े हैं जिनमें आम नागरिक सरकारी दारू दुकानों से या बार में बैठकर सरकारी पेय पदार्थ को ग्रहण करते हैं।


