न खाऊंगा न खाने दूंगा यह भी जुमला ही साबित हुआ
- By 24hnbc --
- Tuesday, 19 Jan, 2021
24HNBC वैसे तो टेलीविजन रेटिंग प्वाइंट यानी टीआरपी का खेल और उसे लेकर चल रहा विवाद चैनलों के बीच का आपसी मामला है पर इस मामले में मुंबई में जो खुलासे हो रहे हैं उससे केंद्र सरकार की साख का भट्ठा बैठा है। जिस तरह से एक जमाने में कारपोरेट लॉबिस्ट नीरा राडिया के टेप जारी हुए थे और पता चला था कि कैसे नामी पत्रकार बरखा दत्त कांग्रेस में अपने रसूख के दम पर डीएमके को विभाग दिलाने और किसी खास नेता को खास विभाग का मंत्री बनवाने के अभियान में शामिल थीं। वैसे ही अब पता चला है कि रिपब्लिक टीवी के मालिक और संपादक अर्नब गोस्वामी केंद्र सरकार में अपनी पहुंच के दम पर टेलीकॉम रेगुलेटरी ऑथोरिटी ऑफ इंडिया यानी ट्राई और भारत सरकार के सूचना व प्रसारण मंत्रालय में बन रही नीतियों को प्रभावित कर रहे थे।असल में मुंबई पुलिस ने टीआरपी के बड़े घोटाले का पर्दाफाश किया है, जिसके केंद्र में अर्नब गोस्वामी हैं। टीआरपी का पूरा सिस्टम देखने वाली संस्था बार्क के पूर्व प्रमुख पार्थो दासगुप्ता के साथ व्हाट्सएप्प पर हुई उनकी चैट सार्वजनिक हो गई है। बताया जा रहा है कि मुंबई पुलिस ने इसे टीआरपी मामले में आरोपपत्र में शामिल किया है। कुछ दिन पहले तक अर्नब गोस्वामी बॉलीवुड के छोटे-छोटे कलाकारों की चैट सार्वजनिक कर रहे थे, अब उनकी खुद की चैट सार्वजनिक हो गई। यही प्राकृतिक न्याय है! बहरहाल, इससे पता चलता है कि बार्क के लोग अर्नब के चैनल को बेहतर टीआरपी हासिल करने में मदद करते थे और बदले में अर्नब दिल्ली में बन रही नीतियों की जानकारी देकर या उनमें बदलाव करा कर बार्क की मदद करते थे। सोचें, इससे न खाऊंगा न खाने दूंगा के मंत्र वाली सरकार की साख का क्या बनता है?


