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सेक्टर 9 कभी था बीएसपी की शान अब है बदहाली का दौर

 

 

 

24HNBC- भिलाई। मध्य भारत का सबसे बड़ा और सुव्यवस्थित प.जवाहर लाल नेहरू चिकित्सालय एवं अनुसंधान केंद्र सेक्टर-9 अपनी बदहाली पर रो रहा है। यह अस्पताल भिलाई इस्पात संयंत्र द्वारा संचालित है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी। दवाइयों का अभाव।कर्मचारियों का बढ़ता गुस्सा, बीएसपी को ही बदनाम कर रहा है। यहां कर्मचारियों और अधिकारियों का बेहतर इलाज नहीं होने का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। कार्मिकों को देश के प्रतिष्ठित निजी अस्पतालों के लिए रेफर किया जा रहा है।सेक्टर-9 अस्पताल से पहले सालभर में 50 लोग रेफर किए जाते थे। आज 18 हजार कर्मचारियों में सालभर में 500 से ज्यादा रेफर किए जा रहे हैं।बीमारियां भी बढ़ी है। समुचित इलाज नहीं होने से और बीमारी बढ़ती जा रही है। अस्पताल के स्टाफ का आंकड़ा भी बिगड़ चुका है। पहले जितने कर्मचारी थे, उनके हिसाब से डाक्टर थे। इलाज भी किया जाता था। रेफर कभी-कभार हुआ करता था। एक समय 60 हजार कर्मचारी थे। आज 16 हजार हैं। प्रबंधन का कहना है कि हमारा काम स्टील बनाना है। सुविधा देखना नहीं है।यही वजह है कि धीरे-धीरे टाउनशिप, स्कूल, अस्पताल में सुविधाओं में कटौती होती जा रही है। कर्मचारियों के परिवार वालों को छोड़िए, कर्मचारियों अपना ही इलाज कराने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इसका प्रभाव उत्पादन पर पड़ रहा है।चौपट व्यवस्था से ही उठी मेडिकल कालेज की आवाजसेक्टर-9 अस्पताल में इलाज को लेकर सबसे ज्यादा परेशान कर्मचारी और अधिकारी ही हो रहे हैं। बेहतर व्यवस्था नहीं होने से निजी अस्पतालों पर निर्भर होना पड़ रहा है। बेहतर संसाधन होने के बाद भी समुचित उपचार नहीं होने की शिकायत आम बात है। यही वजह है कि विधायक एवं महापौर देवेंद्र यादव ने सबसे पहले सेक्टर-9 अस्पताल को मेडिकल कालेज बनाने की मांग उठाई थी।राज्य सरकार ने इसके लिए टीम तक गठित कराई। कलेक्टर ने दौरा तक किया। इसके बाद बीएसपी आफिसर्स एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मिलकर भिलाई में मेडिकल कालेज की मांग की। ओए का स्पष्ट रूप से कहना था कि अस्पताल की व्यवस्था बेहतर नहीं है। इसलिए राज्य सरकार भिलाई में बेहतर अस्पताल की व्यवस्था कराए।पीआइजी बनाने से मिलेगी बड़ी राहतकर्मचारी यूनियन हिंद मजदूर सभा-एचएमएस ने सेक्टर-9 अस्पताल को मेडिकल कालेज के बजाय पीजीआई (पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल कालेज) का सुझाव दिया है। इसका सीधा लाभ कर्मचारियों और उनके परिजनों को मिल सकेगा। दक्षिण भारत के अस्पताल में जो सुविधाएं हैं।यहां कुछ भी नहीं है। इसी अस्पताल में पहले महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, ओडिशा तक के मरीज इलाज कराने आते थे। आज यहां से मरीजों को बाहर भेजा जा रहा है।