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डीआरजी के पीछे क्यों पड़ते हैं नक्सली

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समाचार -
बिलासपुर, 27 अप्रैल 2023। छत्तीसगढ़ के बस्तर के 7 जिलों मे 2008 में डीआरजी का गठन किया गया सबसे पहले इनकी तैनाती कांकेर और नारायणपुर में हुई। 2013 बीजापुर - बस्तर, 2014 में सुकमा - कोंडागांव , 2015 में दंतेवाड़ा में डीआरजी को नक्सलियों से लड़ने के लिए तैनात किया गया। दंतेश्वरी जिला रिजर्व गार्ड की महिला कमांडो इकाई है रिपोर्ट बताती है कि डीआरजी में अधिकारियों समेत जवानों की कुल संख्या 1700 के करीब है। आंकड़े के मुताबिक डीआरजी के सबसे ज्यादा 482 कर्मी उग्रवाद प्रभावित सुकमा में तैनात हैं उसके बाद बीजापुर में 312 डीआरजी के जवानों को सन ऑफ दि वाइल कहां जाता है क्योंकि इसके जवानों में स्थानीय युवा और सलेण्डर कर चुके नक्सलियों को शामिल किया जाता है। आंकड़ों के मुताबिक डीआरजी ने 2015 में 644 नक्सल विरोधी अभियान चलाएं इस दौरान उन्होंने 46 नक्सलियों को मारा। 18 में डीआरजी और अन्य बलों ने 144 अभियान चलाएं जिसमें 25 माओवादी मारे गए। गृह मंत्रालय ने 2021 में लोकसभा में बताया कि 2011 से लेकर 2020 तक छत्तीसगढ़ में 3732 नक्सली हमले हुए इन हमलों में 489 जवान शहीद हुए। 2021 की रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ में 8 जिले नक्सल प्रभावित हैं। बीजापुर, सुकमा, बस्तर, दंतेवाड़ा, कांकेर, नारायणपुर, राजनांदगांव, और कोंडागांव दंतेवाड़ा में 26 अप्रैल को आईईडी ब्लास्ट से जो गाड़ी उड़ाई गई उसमें 10 पुलिसकर्मी शहीद हुए यह घटना दोपहर 2:00 बजे की है। घटना के बारे में सूत्र बताते हैं कि रोड ओपनिंग पार्टी जो सैनिकों के आवाजाही के पहले मार्ग को साफ करने में शामिल है को सक्रिय नहीं किया गया था। नक्सली हमले में 40 से 50 किलो विस्फोटक का इस्तेमाल किया बताया जा रहा है विस्फोट से अरनपुर जगरगुंडा मार्ग पर 15 से 20 फुट चौड़ा गड्ढा हो गया है शव विस्फोट की वजह से 150 मीटर दूर तक गिरे है। आमतौर पर डीआरजी जवान यात्रा के लिए मोटरसाइकिल का इस्तेमाल करते हैं। घटना स्थल सिक्योरिटी फोर्स के 2 कैंप के बीच पड़ता है। अरनपुर पुलिस थाना यहां से दो-तीन किलोमीटर दूर है।