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महमंद में समावेशी संदेश के साथ मनाया जाता है हरेली तिहार
- By 24hnbc --
- Tuesday, 26 Jul, 2022
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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर । हरेली तिहार छत्तीसगढ़ की संस्कृति और आस्था से हमको परिचित कराता है यह सावन के माह में सामाजिक समावेश का संदेश देने वाला त्यौहार है। खेती किसानी से जुड़ा हुआ है, मानसून का प्रारंभ हो गया रहता है खेत में पानी रहता है और फसल की बुवाई और रोपाई का काम चलता रहता है लिहाजा कृषि संबंधी उपकरणों को साफ सफाई और पूजा अर्चना हो जाती है। भारतीय त्योहार हो और खाना ना हो यह हो ही नहीं सकता लिहाजा छत्तीसगढ़ी व्यंजन गुड का चीला इस समय खूब बनाया और खाया जाता है। महमंद ग्राम पंचायत में यहां के प्रतिष्ठित नागरिक नागेंद्र राय के आवास पर हरेली का तिहार समावेशी रूप से मनाते हुए 5 साल हो गए हैं यह छठवां साल है। गांव ही नहीं क्षेत्र के बड़े बुजुर्गों को बेहद सम्मान के साथ आमंत्रित किया जाता है और उनका सम्मान कर आशीर्वाद लिया जाता है। छत्तीसगढ़ में जब से कांग्रेस सरकार आई छत्तीसगढ़ी त्योहारों को बड़े उल्लास के साथ मनाया जा रहा है तीजा, पोला, मां कर्मा जयंती, छेरछेरा, विश्व आदिवासी दिवस पर सामूहिक रूप से त्यौहार मनाने की परंपरा अपनाई जा रही है वैसे भी जब से छत्तीसगढ़ राज्य में किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य, किसान सम्मान योजना, गौठान जिसके माध्यम से पशुधन के गोबर से लेकर गौमूत्र तक को अर्थव्यवस्था से जोड़ दिया गया है तब से देसी त्योहार पर उत्साह देखते ही बनता है हरेली के दिन पशुपालन से जुड़ा वर्ग सुबह से ही अपने पशुओं को नमक और बगरंडा का पत्ता खिलाते हैं यह काम हरेली के दिन ही होता है। इसी दिन घर के प्रवेश द्वार पर नीम की पत्ती लगाई जाती है और चौखट पर कील लगाकर नकारात्मक ऊर्जा को दूर भगाया जाता है। हरेली हो और गेड़ी ना चढा जाए तब तो यह त्यौहार अधूरा है महमंद में आवास के सामने स्थित बड़े मैदान में युवा एवं बच्चे हरेली से तीजा तक गेडी चढ़ते रहते हैं गेडी हमें एक अन्य परंपरा के बारे में भी बताती है। गेडी पर चढ़ना हरेली से तीजा तक होता है बारिश के कारण पहले गांव की गलियों में कीचड़ हो जाता था तब यह गेड़ी बड़े काम आती थी तीजा के दिन गेड़ी पर चढ़कर तालाब तक जाते हैं और फिर नहाने के बाद गेडी वहीं छोड़ कर आ जाते हैं फिर साल भर उस पर नहीं चला जाता । हरेली के दिन नारियल को दूर तक फेंकने का खेल भी होता है नारियल फेंकना कठिन काम है और इसमें निपुण होना गांव के हीरो होने के समान हैं। पूर्व में महमंद क्षेत्र में हरेली सामूहिक रूप से नहीं मनाई जाती थी सामाजिक एकता बुजुर्गों को एक स्थान पर लाकर सम्मान देना और उनसे आशीर्वाद लेना के साथ गांव के विकास के लिए आम राय भी बनती है यही कारण है कि नागेंद्र राय के निवास पर होने वाला हरेली त्यौहार धीरे धीरे क्षेत्र में लोकप्रिय हो गया है और इस बार 28 तारीख को यहां पर विशेष आयोजन रखा गया है।


