24hnbc
मुख्यमंत्री का एक चाबुक और नींद से जागे...... .....
- By 24hnbc --
- Friday, 12 Nov, 2021
24hnbc.com
समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर। कुछ ही दिन बाद छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल उत्तर प्रदेश में पूरी तरह व्यस्त होने वाले हैं। उसके पहले वह एक बार फिर से राजधानी से लेकर जिला स्तर तक यह संदेश देना चाहते हैं कि सरकार कांग्रेस की है और वे इसके मुखिया हैं पिछले 4 महीने से प्रशासनिक हलकों पर साथ में राजनीतिक हलकों में इस बात को कोई मान ही नहीं रहा था कि श्री बघेल प्रदेश के मुखिया हैं। अब संदेश आया और इस्तीफा हुआ कई ने तो शपथ ग्रहण का दिन और समय तक बताने में गुरेज नहीं किया यहां तक की मुंबई स्थित एक टीवी न्यूज़ चैनल ने 2 से 4 घंटे इस आशय का स्क्रोल चलाया कि छत्तीसगढ़ का मुख्यमंत्री बदल दिया गया है। इन्हीं सब का परिणाम यह हुआ कि यूपी में अत्यधिक व्यस्त होने से पहले मुख्यमंत्री ने पहले कलेक्टरों की क्लास लगाई और फिर पुलिस प्रमुखों की इस बार उन्होंने जिला स्तर अथवा जोन में तबादला ना कर सीधे डीजीपी को ही बदल दिया। यह एक डंड शेष घोड़ों को चाबुक के समान लगा है लगता है मंत्रियों का अधिकारियों के साथ हनीमून समाप्त और अब कुछ कर के दिखाने की बारी है अन्यथा चुनाव के समय कौन किसका, डीजीपी बदलने के साथ ही रेंज स्तर पर आईजी तमाम पुलिस अधीक्षकों की बैठक ले रहे हैं और बैठक से निकलने के बाद अपने-अपने जिला तक पहुंचने के पहले ही अधीक्षक 2 से 4 को लाइन अटैच कर देता है। बिलासपुर के पुलिस अधीक्षक तो बैठक के बाद थाना क्षेत्रों में पैदल घूमते नजर आए वह भी अपनी टीम के साथ, इसी तरह मंगलवार की टीएल बैठक हंसी मजाक में दीपावली मनाते नहीं गुजरी जन चौपाल जो लगानी थी वैसे बेहतर होता जनता को अपने सामने ना बुलाकर जनता के पास जाते। नागरिक आज भी कलेक्टर के रुतबे के सामने घुटनों पर बैठता दिखाई देता है ऐसे में दबदबा और रौब के सामने बेचारा नागरिक। बिलासपुर कलेक्टर से आम जनता मिल भी ले लेकिन उनके एसडीएम सिपहसलार और अन्य मातहत अधिकारी का रुखा व्यवहार देखते ही बनता है। बिलासपुर के सिटी मजिस्ट्रेट के सामने रोज अलग-अलग थाना क्षेत्र के सिपाही मानव अधिकार का खुला उल्लंघन करते हैं साधारण 151, 107, 116 के अभियुक्तों को हथकड़ी लगाकर पेश किया जाता है और पीठासीन अधिकारी इस बात पर सिपाहियों को कभी कुछ नहीं कहते जिन्हें सरकारी लोहे के कड़े अखरते हैं वे उसे न पहनने का नजराना सिपाही को देते हैं इन हथकड़ियों से ही पता चलता है कि आज भी लोकतंत्र कैसे नौकरशाह के सामने हाथ झुका कर खड़ा है।
"शीर्षक का अंतिम शब्द इसलिए नहीं लिखा जा रहा कि तमाम सरकारी अधिकारी जो स्वयं का जैसा आकलन करते हैं वैसा पड़े"।


