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डायरेक्टर और सेक्रेटरी पर भारी जिला कार्यक्रम अधिकारी
- By 24hnbc --
- Sunday, 18 Jul, 2021
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समाचार -
बिलासपुर । महिला एवं बाल विकास विभाग के सबसे बड़े अधिकारी डायरेक्टर और सेक्रेटरी होते है और इनके आदेश अंतिम होते है और इनके आदेश का पालन करना विभाग के तमाम अमले के लिए अनिवार्य होते है लेकिन बिलासपुर के जिला कार्यक्रम अधिकारी डायरेक्टर और सेक्रेटरी से भी बड़ा हैसियत रखता है तभी तो डायरेक्टर के आदेश की नाफरमानी करना उसके लिए शौक हो गया है ।आदेश नही मानने के बाद भी उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं सकती ।अब तबादला आदेश में भारमुक्त करने के मामले को ही ले लें।डायरेक्टर ने दो आदेश भारमुक्त जारी करने जारी किए मगर जिला कार्यक्रम अधिकारी को आदेश मानना ही नही था सो उसने दो कर्मियों को भारमुक्त ही नही किया और तो और एक महिला पर्यवेक्षक का साल 2019 में तबादला हो जाने के बाद भी उसका वेतन अभी तक बिलासपुर से ही निकाला जा रहा । ऐसा करिश्मा पूरे प्रदेश में सिर्फ बिलासपुर में ही देखने को मिलेगा क्योंकि यहां के जिला कार्यक्रम अधिकारी सर्वशक्तिमान जो ठहरे ।
महिला एवं बाल विकास विभाग में वर्ष 2019 में बड़े पैमाने पर तबादले हुए थे लेकिन हाईकोर्ट में अपील के चलते कुछेक कर्मचारी स्थानांतरित जगह में पदभार ग्रहण नहीं किए लेकिन हाईकोर्ट द्वारा तबादले के विरुद्ध पेश याचिकाओं को निराकृत कर देने के बाद भी जब कुछेक कर्मियों को भारमुक्त नहीं किया गया तो विभाग के डायरेक्टर ने पिछले साल यानि वर्ष 2020 में एक आदेश जारी कर कार्यक्रम अधिकारी को निर्देशित किया कि स्थांतरित पर्यवेक्षकों/कर्मियों को “आज ही”भारमुक्त करें मगर कार्यक्रम अधिकारी ने डायरेक्टर के आदेश को एक जन से सुनकर दूसरे कान से निकाल दिया और अपने चहेते कर्मियों को भारमुक्त नहीं किया गया। जिला कार्यक्रम अधिकारी के इस रवैए के बाद डायरेक्टर ने 3 जुलाई 2021 को एक आदेश जारी कर पूर्व में स्थांतरित किए गए दो पर्यवेक्षकों हरिप्रिया पटेल और संजू तिवारी को तत्काल भारमुक्त करने का आदेश दिया लेकिन इस आदेश का जिला कार्यक्रम अधिकारी पर कोई असर नहीं पड़ा और 15 दिन बाद भी उन दोनो पर्यवेक्षकों को भारमुक्त नहीं किया गया इतना ही नहीं श्रीमती संजू पटेल को तबादले के दो वर्ष बाद भी उनका वेतन बिलासपुर से निकाला जा रहा है । इतनी बड़ी नाफरमानी और आदेश की अवमानना के बाद भी डायरेक्टर और सचिव पता नही क्यों जिला कार्यक्रम अधिकारी के खिलाफ कारवाई करने में कतरा रहे है।पता नही जिला कार्यक्रम अधिकारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों की कमजोरी की कौन सा नस दबाए बैठे है।तभी तो डंके की चोट पर जिला कार्यक्रम अधिकारी डायरेक्टर और सेक्रेटरी पर भारी पड़ गए है ।
महिला एवं बाल विकास विभाग में वर्ष 2019 में बड़े पैमाने पर तबादले हुए थे लेकिन हाईकोर्ट में अपील के चलते कुछेक कर्मचारी स्थानांतरित जगह में पदभार ग्रहण नहीं किए लेकिन हाईकोर्ट द्वारा तबादले के विरुद्ध पेश याचिकाओं को निराकृत कर देने के बाद भी जब कुछेक कर्मियों को भारमुक्त नहीं किया गया तो विभाग के डायरेक्टर ने पिछले साल यानि वर्ष 2020 में एक आदेश जारी कर कार्यक्रम अधिकारी को निर्देशित किया कि स्थांतरित पर्यवेक्षकों/कर्मियों को “आज ही”भारमुक्त करें मगर कार्यक्रम अधिकारी ने डायरेक्टर के आदेश को एक जन से सुनकर दूसरे कान से निकाल दिया और अपने चहेते कर्मियों को भारमुक्त नहीं किया गया। जिला कार्यक्रम अधिकारी के इस रवैए के बाद डायरेक्टर ने 3 जुलाई 2021 को एक आदेश जारी कर पूर्व में स्थांतरित किए गए दो पर्यवेक्षकों हरिप्रिया पटेल और संजू तिवारी को तत्काल भारमुक्त करने का आदेश दिया लेकिन इस आदेश का जिला कार्यक्रम अधिकारी पर कोई असर नहीं पड़ा और 15 दिन बाद भी उन दोनो पर्यवेक्षकों को भारमुक्त नहीं किया गया इतना ही नहीं श्रीमती संजू पटेल को तबादले के दो वर्ष बाद भी उनका वेतन बिलासपुर से निकाला जा रहा है । इतनी बड़ी नाफरमानी और आदेश की अवमानना के बाद भी डायरेक्टर और सचिव पता नही क्यों जिला कार्यक्रम अधिकारी के खिलाफ कारवाई करने में कतरा रहे है।पता नही जिला कार्यक्रम अधिकारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों की कमजोरी की कौन सा नस दबाए बैठे है।तभी तो डंके की चोट पर जिला कार्यक्रम अधिकारी डायरेक्टर और सेक्रेटरी पर भारी पड़ गए है ।


