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ग्रामीणों की मौत और घायल लोगों के संदर्भ में बने सर्व आदिवासी समाज की जांच दल को पुलिस प्रशासन ने मौके पर जाने से रोका.....सुभाष परते
- By 24hnbc --
- Thursday, 20 May, 2021
24 HNBC. बिलासपुर
बिलासपुर/ बस्तर। छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष ने बताया 17 मई 2021 को बीजापुर सुकमा जिले के सीमावर्ती ग्राम सिलगेर में खोले जा रहे पुलिस कैंप का विरोध ग्रामीण जनों द्वारा किया जा रहा था इसके पूर्व भी ग्रामीण जनों द्वारा प्रस्ताव पारित कर जिला पुलिस प्रशासन को विरोध दर्ज करा चुके थे, पर इस पर ध्यान न देकर बलात् खोला जा रहा है। ग्रामीण जनों 17 जून को एकजुट होकर प्रदर्शन किये तो पुलिस के द्वारा आंसू गैस लाठीचार्ज कर भीड़ को एकाएक गोली बरसाए गया जिसमें तीन ग्रामीणों की मौके पर ही मृत्यु हो गई और 19,20 ग्रामीण जन गंभीर रूप से घायल हैं। और ज्ञात हुआ है कि कुछ ग्रामीण जन लापता है। जिसे पुलिस प्रशासन द्वारा नक्सलियों के दबाव में किया गया प्रदर्शन बताया गया एवं कैंप में नक्सलियों द्वारा हमला बताकर मृतकों को नक्सली बता रहे हैं। और वहां ग्रामीण जनों व उस वक्त उपस्थित पत्रकारों एवं सोशल मीडिया में डाले वीडियो ऑडियो में पुलिस द्वारा अंधाधुंध फायरिंग एवं लाठीचार्ज की स्थिति दिख रही है ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में कैंप बनने से अनावश्यक भय एवं साथ हीं कई घटनाओं के होने की आशंका जताए वह ग्रामीण जनों द्वारा घटना में मारे गए एवं घायल लोगों को ग्राम के ही वासी बतलाया गया वह नक्सली बताए जाने को सरासर झूठ कहा जा रहा है। पुलिस और नक्सलियों की लड़ाई में सबसे ज्यादा बेगुनाह आदिवासी पीड़ित है दोनों के आड़ में बस्तर का शोषण हो रहा है ।एवं लोग बेवजह मारे जा रहे इस घटना को देखते हुए छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज प्रदेश कमेटी द्वारा उक्त घटना के बारे में पड़ताल करने हेतु सुकमा एवं बीजापुर जिले के 15 सदस्यों का जांच दल गठित कर दिनांक 20 मार्च 2021 गुरुवार को जांच करने हेतु निर्देशित किया गया था। वह घटनास्थल पर जाकर अपनी रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया।
परंतु पुलिस प्रशासन द्वारा जांच दल को घटनास्थल में ग्रामीणों व प्रशासन से अपनी रिपोर्ट तैयार करने हेतु जानबूझकर मिलने नहीं दिया बीजापुर जांच दल को तिम्मापुर कैंप में व सुकमा जांच दल को जगरगुडा कैंप में रोक दिया गया जबकि अन्य दलों को जाने दिया जा रहा है परंतु सर्व आदिवासी समाज के जांच दल को नहीं जाने देना कई आशंकाओं को जन्म दे रहा है जिसमें सर्व आदिवासी समाज में अत्यधिक आक्रोश है आने वाले दिनों में वृहद रूप से इसका विरोध किया जाएगा आज पूरे देश में कोरोना काल है एवं लोग संक्रमित हैं लाक डाउन के नाम पर लोगों को जगह जगह रोका जा रहा है लोगों को बाजार जाने राशन लेने वनों में वनों उपज संग्रहित करने से रोका जा रहा है और प्रशासन इस स्थिति में जगह-जगह नक्सली उन्मूलन के नाम पर कैंप बना रही है जहां नक्सली गतिविधि कम होने की जगह बढ़ रहा है एवं नया कैंप बनने से जनआक्रोश व्याप्त हो गया है।चाहे वह आज नक्सली की ओर से बेगुनाह आदिवासी मारा जा रहा हो व पुलिस की गोलियों का भी शिकारा भी आदिवासी ही हो रहा है । बस्तर के संसाधनों को लूटने का एक प्रयास कुटिल रचना जो चल रही है वह आज सबको समझ आ रहा है पूरे भारत भर के आदिवासियों एवं अन्य संगठनों में इस घटना को लेकर वह बस्तर की अशांति को लेकर एक जन आक्रोश निर्मित हो गया है। इस स्थिति में जांच दल को रोकना कई प्रश्न खड़े कर रहे हैं शासन प्रशासन लोगों में अपना विश्वास नहीं जगा पा रहे है, सर्व आदिवासी समाज इस घटना की भर्त्सना करता है।


