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प्रशांत के भरोसे दामोदर शाह
- By 24hnbc --
- Sunday, 11 Apr, 2021
24HNBC भारतीय जनता पार्टी की आईटी सेल ने चाय की प्याली में तूफान उठाया हुआ है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर की कुछ पत्रकारों के साथ एक सोशल मीडिया साइट पर हुई बातचीत के कुछ ऑडियो क्लिप जारी करके आईटी सेल ने दावा किया है कि तृणमूल कांग्रेस ने हार मान ली है। अभी तक भाजपा के छोटे-छोटे नेता इस ऑडियो क्लिप के आधार पर भाजपा की जीत और तृणमूल की हार का दावा कर रहे हैं, लेकिन बड़े और ‘महान’ नेताओं द्वारा भी इसे दोहराया जाना महज वक्त की बात है। चुनाव के मध्य में इस तरह की बातों के आधार पर कोई दूसरी पार्टी जीत का दावा करती तो उसे ‘डेस्पेरेट अटेंम्प्ट’ यानी घबराहट में किया जाने वाला प्रयास बताया जाता, डूबते को तिनके का सहारा कहा जाता, लेकिन चूंकि यह बात भाजपा कह रही है इसलिए यह मास्टर स्ट्रोक माना जाएगा।लेकिन असलियत यह है कि प्रशांत किशोर ने इस बातचीत में कोई नई या अनोखी बात नहीं कही है। जो लोग इस बातचीत के आधार पर जीत का निष्कर्ष निकाल रहे हैं उन्होंने भी अगर दो हफ्ते पहले अंग्रेजी के अखबार ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के एक्सप्रेस अड्डा कार्यक्रम में प्रशांत किशोर का इंटरव्यू देखा-पढ़ा होता तो उनको पता होता कि इस ऑडियो क्लिप में कही गई, ज्यादातर बातें उन्होंने उस इंटरव्यू में भी कही थीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता की बात हो या दलित समुदाय के भाजपा के पक्ष में मतदान करने की बात हो या ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ एंटी इंन्कंबैंसी होने की बात हो, ये सारी बातें प्रशांत किशोर ने एक्सप्रेस अड्डा कार्यक्रम के अपने इंटरव्यू में कही थी। उस समय किसी ने इस बात को नोटिस ही नहीं किया क्योंकि वह एक खुला इंटरव्यू था। लेकिन वहीं बातें अब एक सोशल मीडिया साइट पर कही गईं तो उसे एक स्कूप के तौर पर, एक खुलासे या एक स्वीकारोक्ति के तौर पर सनसनी बना कर पेश किया जा रहा है। ऐसा लग रहा है कि सोशल मीडिया में कथित तौर पर कही गई प्रशांत किशोर की बातों पर तो भाजपा भरोसा है लेकिन वहीं प्रशांत किशोर जब कहते हैं कि भाजपा को एक सौ सीट नहीं मिलेगी, तो भाजपा इसे नहीं स्वीकार करती है।बहरहाल, सब अपने अपने तरीके से प्रशांत किशोर की बातों की व्याख्या कर रहे हैं। जैसे भाजपा के प्रति सहानुभूति रखने वाले एक सैफोलॉजिस्ट ने ट्विट करके कहा कि वे प्रशांत किशोर का सम्मान करने लगे हैं क्योंकि उन्होंने मुस्लिम तुष्टिकरण और ध्रुवीकरण को लेकर वह बात कही है, जो वे 20 साल पहले कहते थे। अब सोचें, पश्चिम बंगाल में या पूरे देश में ही भाजपा विरोधी पार्टियों द्वारा मुस्लिम तुष्टिकरण किए जाने और इस वजह से सांप्रदायिक आधार पर ध्रुवीकरण होने की बात कौन सी नई बात है, जो प्रशांत किशोर ने कही है! क्या 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के बुरी तरह से हारने के बाद यही बात कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एके एंटनी ने नहीं कही थी? चुनाव के बाद एंटनी कमेटी बनी थी और उस कमेटी ने विधिवत रिपोर्ट तैयार करके कांग्रेस अध्यक्ष को दी थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि पूरे देश में कांग्रेस की छवि मुस्लिमपरस्त पार्टी की बन गई है, जिसका खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ा है।एके एंटनी का कहना प्रशांत किशोर के मुकाबले ज्यादा स्पष्ट था और उसके बाद से ही देश में कांग्रेस सहित कई पार्टियों के नेताओं का सार्वजनिक व्यवहार बदला है, जिनमें ममता बनर्जी भी शामिल हैं। प्रशांत किशोर ने एक्सप्रेस अड्डा के अपने इंटरव्यू में यह बात कही थी कि बंगाल में भाजपा के प्रयासों से सांप्रदायिक ध्रुवीकरण हुआ है। लेकिन खुद ही सवालिया लहजे में कहा कि क्या यह ध्रुवीकरण इतना है कि भाजपा को चुनाव जीता सके? बंगाल में भाजपा के तमाम प्रयासों और आठ चरण के चुनाव में चोटीवाले, दाढ़ीवाले करने या बांग्लादेश-पाकिस्तान का जिक्र लाने या एंटी रोमियो स्क्वॉयड बनाने के वादों के बावजूद ध्रुवीकरण इतना नहीं है कि भाजपा स्पष्ट बहुमत पाती हुई दिखे। अब अगर भाजपा यह उम्मीद कर रही है कि प्रशांत किशोर की बात पूरे बंगाल में जंगल की आग की तरह फैल जाएगी और सारे लोग एकजुट होकर भाजपा को वोट दे देंगे तो यह उसकी गलतफहमी साबित होगी। क्योंकि प्रशांत किशोर बंगाल चुनाव में अहम नहीं हैं


