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महमंद में मरघट की जमीन का होगा सीमांकन
बिलासपुर/मस्तूरी 24 HNBC.
बिलासपुर/ मस्तूरी । मार्च माह में ग्राम पंचायत महमंद की तरफ से कलेक्टर बिलासपुर को एक ज्ञापन सौंपा गया था। जिस को आधार बना कर अब गांव के मरघट की जमीन का सीमांकन होने वाला है शासकीय आदेश के अनुसार यह सीमांकन 4 अप्रैल के पूर्व हो जाना चाहिए ऐसा बताया जाता है कि मरघट से रोड काटकर उसके पीछे की जमीनों को अवैध तरीके से प्लाट बनाकर बेच दिया गया। मरघट की जमीन का सीमांकन होने की खबर से पूर्व सरपंच नीरज राय उर्फ पिंटू और उनके साथियों के बीच खलबली मची है ऐसा माना जाता है कि खसरा नंबर 101/ 7 और 101/2 का सीमांकन का झगड़ा अब सार्वजनिक हो गया है महमंद में अवैध प्लाटिंग का धंधा कई साल से चल रहा है और दबाव समूह ने इसकी आड़ में खूब पैसा कमाया जानकारों का माने तो महमंद की शासकीय जमीनों पर प्लाट काटकर बेचने का काम भी खूब हुआ इस खेल में राजस्व अधिकारियों ने भी संदिग्ध भूमिका अदा की किसानों की जमीनों को जब इकरारनामा के आधार पर दलालों ने बेचा तो रोड नाली की जमीन खाते में बच गई और उस बची हुई जमीन को शासकीय जमीन में फिट करके लाखों रुपए का धंधा हुआ। ऐसे खतरों में 441/1, खसरा नंबर 444 खसरा नंबर 440 और खसरा नंबर 436/1 में जमकर खेल हुआ है। महमंद ग्राम पंचायत की भौगोलिक स्थिति उसे विशेष बनाती है, एक तरफ जहां यह रेलवे क्षेत्र से लगा हुआ है, वही औद्योगिक क्षेत्र से सटा हुआ है, नेशनल हाईवे के बाईपास पर होने के कारण यह रायपुर बिलासपुर जांजगीर-चांपा मार्ग को टच करता है । भूमिगत जल के संवर्धन की दृष्टि से भी यह क्षेत्र माकूल है किंतु अब यहां के तालाबों पर जमीन दलालों की नजर लगी है ऐसे भी राजस्व अधिकारियों को यह तय करना होगा कि वह किस तरह खड़े हैं उस सरकार के साथ जिसका वेतन लेते हैं या उन भू माफियाओं के साथ जो उन्हें अवैध धंधे में अपना पार्टनर बनाते हैं।