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तेल के खेल में व्यापारी काट रहे हैं मलाई आम नागरिक हो रहा बर्बाद

बिलासपुर 24 hnbc. 

बिलासपुर। तेल के खेल में किचन का बजट बिगाड़ कर रख दिया है इस तरह पेट्रोल और खाद्य तेल दोनों के बीच संतुलन बनाना और गृहस्थी चलाना अब खेल हो गया है ।नट के समान पिछले 8 महीने में खाद्य तेलों के रेट इस तरह बदलते चले गए जैसे कभी किसी ने कल्पना ही नहीं की थी इन दिनों पाम ऑयल और सोयाबीन ऑयल के बीच सिर्फ 20 रुपए से 30 रुपए तक का अंतर है। पूर्व में यह अंतर 300 रुपए तक था । पाम ऑयल को घटिया किस्म का तेल माना जाता था और गृहस्ती के अंदर इसका उपयोग कोई नहीं करता था। कुछ लोग कहते थे कि लोकल नमकीन और समोसे वाले इसका उपयोग करते हैं किंतु अब ऐसा नहीं है तेल का रेट बढ़ने के बाद भी ना तो नमकीन का रेट बदला है ना ही समोसा का रेट... 

खाद्य तेल में तीन कैटेगरी बनाई जा सकती है पहला सोयाबीन दूसरा सूर्यमुखी तीसरा मूंगफली और चौथा सरसों का तेल एक और तेल लोकप्रिय हुआ जिसे राइस ब्रांड कहा जाता है । बाजार में इन तीनों के रेट में 8 माह के भीतर ही 40 से 50 रुपए तक का इजाफा हो चुका है। यह इजाफा प्रति लीटर बोला जा रहा है यहां यह समझ लेना चाहिए कि एक पैकेट में 910 एमएम तेल होता है। इन पैकेट पर एमआरपी का अर्थ मैक्सिमम रिटेल प्राइस इन दिनों उदाहरण के तौर पर किंग तेल 160 रुपए एमआरपी है किंतु फुटकर में इसे 128 रुपए से लेकर 155 रुपए तक बेचा जाता है। इसका एक ही अर्थ है कि व्यापारी लूट के काम पर संलग्न है 128 रुपए में एक पैकेट तेल बेचने वाला भी अपने घर से पैसा तो नहीं दे रहा होगा माना जाए तो 128 रुपए के पैकेट बेचने पर भी 8 रुपए का लाभ है। उसी ब्रांड के तेल को दूसरा दुकानदार 140 तो तीसरा 155 रुपए बेच रहा है लोग स्वयं समझे कि लूट कौन रहा है इस बारे में व्यापारिक सूत्र बताते हैं कि तेल के दामों में जो उछाल बड़े बाजार से हुआ है उससे कहीं ज्यादा बदमाशी लोकल व्यापारी कर रहा है बाजार में इन सब घटिया हरकतों पर जिला प्रशासन का ना तो कोई ध्यान जाता है ना ही कोई अधिकारियों को फुर्सत है कि वह कभी जाकर इस लूट के काम को बंद कराएं ।