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सरपंच का बीज सरपंच की मछली बाकी सब मोहरे

बिलासपुर 24 hnbc. 

बिलासपुर। बिल्हा ब्लॉक के अंतर्गत ग्राम पंचायत कोरमी के सरपंच ने सरकार की मत्स्य नीति का ना केवल उल्लंघन किया बल्कि पंचायत के खजाने को भी नुकसान पहुंचाया और शिकायत के बाद मामले को रफा-दफा करने के लिए तकनीकी तरीका यह निकाला की पंचायत के खाते में कोई भी रुपए का लेन-देन नहीं हुआ तो पंचायत के खाते को नुकसान ही नहीं हुआ पूरा किस्सा यह है कि सरपंच ने अपने सचिव के साथ मिलकर तमाम नीतियों से परे जाकर 3 लोगों को गांव के 3 तालाब क्रमशः 25000 3000 और 1000 रुपए पर मछली पालन के लिए आवंटित कर दिया । मछली पालन विभाग में शिकायत हुई जांच हुई जांच अधिकारी ने पाया कि पंचायत द्वारा तालाब का आवंटन करने में मत्स्य नीति का उल्लंघन हुआ है। यही शिकायत जनपद सीईओ के पास गई सीईओ ने नया जांच अधिकारी नियुक्त किया कब तक सरपंच को पता चल चुका था कि उसने क्या गलती हुई है लिहाजा उसने तालाब का आवंटन व्यक्तिगत ना होना कह कर समिति का होना बताया किंतु समिति अपंजीकृत है इसके पूर्व ही जिन्हें तालाब मिला था उन्होंने तालाब में मछली का बीज डाल चुके थे अब जांच के कारण सरपंच ने यह कह दिया कि तालाब का आवंटन निरस्त कर दिया गया है। किंतु इस संदर्भ में उन्होंने जांच अधिकारी को जो बयान दिया है उसमें कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया जिससे यह पता चले कि जिन्हें समितियों को तालाब आवंटन हुआ है वह पंजीकृत हैं अथवा अपंजीकृत इतने सबके बाद भी यह तथ्य ज्ञात हुआ कि पहले तालाब व्यक्ति को दिया बाद में फंसते हुए देखकर समिति को देना बताया समिति अपंजीकृत है और किसी भी स्थिति में आरक्षण के नियमों का पालन नहीं हुआ जो कि गंभीर मामला है कुल मिलाकर सरपंचों मे गौड़ खरीद की राजनीति संबंधी जमीनों से बचने के लिए तालाब में मछली डालने का नया खेल शुरू कर दिया है अब होगा यह कि 3 तालाबों में जो मछली डली है वह सरपंच के चहेते निकालेंगे और पैसे का सीधा बंदरबांट हो जाएगा । क्योंकि जिन्हें भी तालाब का आवंट हुआ उन्होंने सोची समझी राजनीति के तहत पंचायत के खाते में 1 रुपए भी जमा नहीं किया था आवंटन निरस्त हो गया है इस कारण मछली के ऊपर पंचायत का कोई हक नहीं बनता जिसने बीज डाला वह डंडे की दम पर मछली निकालेगा और बेचेगा असल में पूरे मोहरे दिखावटी हैं और सब कुछ सरपंच और सचिव का खेल है।