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राष्ट्रीय प्रतीक या विरोधियों को सजा देने का तरीका

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बिलासपुर, 21 अगस्त 2026। 
भारत में इन दिनों अपराध रोकने के कानून नहीं अपराध की तलाश के लिए कानून बनाया जा रहा है। वंदे मातरम के अपमान को संगे अपराध बना दिया गया यह ऐसा ही कानून है जिससे अपराध की तलाश की जाएगी। इसके लिए सरकार ने 1971 के धार्मिक प्रतीकों वाले कानून को संशोधित किया। इन संशोधन के बाद कहा गया है कि राष्ट्रगान यानी जन गण मन की तरह राष्ट्रगीत वंदे मातरम को भी सम्मान देना होगा। अगस्त 2026 में यह कानून अस्तित्व में आने के पहले जो काम अपराध नहीं था उसे इस कानून के जरिए अपराध बना दिया गया। और उसमें कड़ी से कड़ी सजा का प्रावधान किया गया इसकी कोई आवश्यकता नहीं थी। भाजपा की सरकार ने अपने को दूसरी पार्टियों खास कर कांग्रेस से ज्यादा राष्ट्रवादी दिखाने के लिए वंदे मातरम के सम्मान बढ़ाने का कानून बनाया है। असल में भाजपा पर लगातार इस बात के आरोप लगाते रहे की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने कभी भी आजादी की लड़ाई में हिस्सा नहीं लिया। इतना ही नहीं स्वतंत्रता के कई दशक बाद तक आरएसएस मुख्यालय में तिरंगा नहीं फहराया गया। सो उसकी भरपाई करने के उद्देश्य से यह कानून लाया गया। एक मकसद यह भी हो सकता है कि पेपर लीक से लेकर राम मंदिर चढ़ावा चोरी जैसे कई विवाद से लोगों का ध्यान भड़काया जाए। 
बहरहाल अपराध की तलाश में बनाए गए इस कानून का पहला शिकार कांग्रेस पार्टी बनी। भाजपा की यह विशेषता है कि वह किसी भी पवित्र प्रतीक को विवाद और टकराव के अस्त्र में बदल सकती है उसने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम को धार्मिक और राजनीतिक टकराव का प्रतीक बना कर इस्तेमाल किया और अब आजादी के आंदोलन के पवित्र गीत को विवाद का विषय बना लिया। राष्ट्रगीत वंदे मातरम राष्ट्रवाद का प्रतीक होने के साथ-साथ राजनीतिक विरोधियों को सजा देने का तरीका भी बन गया।