रतनपुर से लेकर बिलासा तक जो हो रहा है वह अचानक नहीं सोचा समझा है
केवल शांति मार्च से नहीं, लगातार जागरूकता, सजगता और निष्पक्षता मांग रहा है... बिलासपुर
- By 24hnbc --
- Thursday, 03 Sep, 2026
24hnbc.com
4 सितंबर 2026।
बिलासपुर जिले में आसपास जो हो रहा है उसे पर पैनी नजर रखना जरूरी है। अब केवल शांति मार्च से काम नहीं चलेगा। गंभीर और निष्पक्ष पत्रकारिता करने वालों को अपनी भूमिका ज्यादा जागरूकता के साथ निभानी पड़ेगी। 28 अगस्त खपरगंज कोतवाली थाना के पास की घटना अचानक नहीं थी। बिलासपुर जिले में पिछले दो महीने में जो कुछ हुआ और अभी होने वाला है उसे पर ध्यान दें...। कोटा ब्लॉक के रतनपुर महामाया मंदिर में जो समस्या चल रही है वह पूरी तरह सोची समझी गई है और उसे धीरे-धीरे विवाद और बाद में हिंसा में तब्दील करने की पूरी तैयारी है। साथ में जिला मुख्यालय बिलासपुर को देखें अगस्त माह में ही दक्षिणपंथी विचारधारा के संगठन द्वारा एक वाद विवाद प्रतियोगिता रखी गई शीर्षक लव जिहाद समस्या और निदान था। इस कार्यक्रम के जो कार्ड सोशल मीडिया पर उपलब्ध हैं उसके अनुसार उसे कार्यक्रम में संभाग आयुक्त भी आमंत्रित थे। गए या नहीं, नहीं पता... असल में यह पूरा माहौल इस तरह है कि पहले थर्मामीटर को बगल में लगाना है तापमान कुछ बढ़ाना है हवा में कुछ खास तरह की तरंगे लाना है और फिर 6 सितंबर रविवार को भाषण होगा काजल, हिंदुस्थानी का आना अब यह समझ की अपने उग्र भाषणों से काजल हिंदुस्थानी ने पहचान कैसे बनाई और छत्तीसगढ़ विशेष कर बिलासपुर जिले में ऐसा क्या होने वाला है।
2014-15 तक इनका फेसबुक अकाउंट पारिवारिक फोटो से लगा हुआ है जैसा आमतौर पर होता है। 2016 में उनके अकाउंट पर नेहरू गांधी परिवार को कोसा जाना शुरू हुआ 2017 में अकाउंट से पीएम मोदी के समर्थन में और राहुल गांधी की आलोचना में लिखा जाने लगा। बताया जाता है कि अभी इनके 80000 से ज्यादा फॉलोअर अकाउंट में मौजूद हैं और पीएम मोदी सहित भाजपा के कई बड़े नेता इनके फॉलोअर हैं। 30 मार्च 2023 में इन्होंने गुजरात के जामनगर क्षेत्र गिर में एक रैली की और जमकर दूसरे समुदाय को भड़काने वाली बातेंकहानी। 9 अप्रैल रामनवमी के दिन इस क्षेत्र में हिंसा भड़क गई, 2 अप्रैल को आईपीसी की धारा 295 ए के तहत उनकी गिरफ्तारी हुई 80 और लोग गिरफ्तार हुए यह मामला ऊना का है। 7 दिन की हिरासत के बाद न्यायालय से इन्हें जमानत मिल गई। काजल का असली नाम काजल सिंहला कहीं-कहीं सिंघाला मिलता है। उनके ट्विटर बायोडाटा के अनुसार वे खुद को उद्यमी, रिसर्च एनालिस्ट, सोशल एक्टिविस्ट और नेशनलिस्ट बोलती है। एक समुदाय विशेष पर टिप्पणी करने के लिए उन्होंने खूब नाम कमाया उनके भाषण के प्रिय विषय लव जिहाद, लैंड जिहाद, बांग्लादेशी घुसपैठियों हुआ करता है। भाषणों में किस तरह गलत तथ्य बोलकर आगे बढ़ा जाता है उसका एक उदाहरण उनके भाषण में मिलता है जब उन्होंने गुजरात के एक विश्वविद्यालय में कहा कि गांधी परिवार ने भारतीय शिक्षा पद्धति को बर्बाद कर दिया । 1947 से 1977 तक पांच शिक्षा मंत्री हुए पांचो मुसलमान थे यह बात पूरी तरह गलत है असल बात यह है कि 1947 से 77 तक नौ शिक्षा मंत्री हुए चार मुसलमान थे और पांच हिंदू थे।
अब इस बात को समझ की क्या इसके पहले भी बिलासपुर में इस तरह के भाषण देने वाले आए हैं तो उदाहरण मिलता है कि 2001 से 2003 के बीच प्रवीण तोगड़िया ने कई बार बिलासपुर आकर उसे समय के भाजपा की जरूरत के अनुरूप खूब भाषण दिए याद रहे तब छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार थी और जिसका नेतृत्व अजीत जोगी के पास था। अब एक बार फिर से यह समझे कि आखिर यह तीन विषय लव जिहाद, लैंड जिहाद और घुसपैठिया की अभी क्या जरूरत है सीधी बात है कि जेन जी, जेन अल्फा, जेन बेटा ने केंद्र के मोदी सरकार को घेर लिया है पेपर लीक, महंगाई, बेरोजगारी, अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दे गंभीरता के साथ चर्चा में आए हैं और क्रॉनिक पूंजीवाद के कारण देश का गरीब तबका और मिडिल क्लास परेशान है तो इन मुद्दों से ध्यान कैसे हटाया जाए और आम अमन पसंद को कैसे बताया जाए की वे खतरे में है। छत्तीसगढ़ में जब छत्तीसगढ़ के मूल निवासी और हमारी जल, जंगल, जमीन पूरी तरीके से निजी क्षेत्र के कब्जे में जा रही है उसे समय जब हमको हमारी अधोसंरचना पर उसे बचाने पर ध्यान देना है तब उसे सब को हास्य में डालने के लिए और फिर ऐसे विषयों पर जिनसे रोजगार नहीं बढ़ने वाला की चर्चा की जाएगी काजल हिंदुस्थानी के ऊपर सोशल मीडिया उसे समय के अखबार बीबीसी की रिपोर्ट कहीं भी उनके नाम के बाद हिंदुस्थानी नहीं लिखा, लिखा है हिंदुस्तानी पर बिलासपुर में जो होर्डिंग लगे हैं उसमें विशेष तौर पर हिंदुस्थानी ही लिखा है यह किसी भी तरह वर्तनी के कारण नहीं हुआ है एक विशेष प्रयोग है हिंदुस्तानी से हिंदुस्थानी करने का, 6 सितंबर को यह पता चलेगा कि वे अपने परंपरागत भाषण के अतिरिक्त बिलासपुर की अमन चैन को स्वीकार करती है या उसमें कुछ छिड़कने का प्रयास करती है।

