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अरुण पन्नालाल एक प्रयोग है, आगे की तैयारी लंबी है

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रायपुर/बिलासपुर, 2 सितंबर 2026। 
ईसाई समाज के व्हिसल ब्लोअर अरुण पन्नालाल की गिरफ्तारी का मामला साधारण नहीं है। जानकारों का कहना है कि यह एक सोच समझ टेस्ट है और देखा जा रहा है कि इसके रिफ्लेक्शन कैसे हो रहे हैं। शहर में भी और अंदर ग्रामीण क्षेत्र में, जंगल में भी अरुण पन्नालाल की गिरफ्तारी के पहले छत्तीसगढ़ के ईसाई समाज की क्रोनोलॉजी को ध्यान देना जरूरी है। धर्मांतरण के एक मामले को लेकर दक्षिण भारत से आई दो नन की गिरफ्तारी को याद करिए। किस तरह दिल्ली और केरल तक हलचल हो गई थी और वामदल भी सक्रिय हो गए थे। सरकार और जांच एजेंसी को किस तरह अपने एक्शन से पीछे हटना पड़ा था और राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राज्य सरकार और केंद्र की फजीहत हुई थी। उसके बाद से ही सरकारी और एजेंसी की कार्य प्रणाली बदली राजधानी के एक स्कूल परिसर में स्थित एक इमारत को तोड़ा गया। डायोसिस ने कहा कि उसका नक्शा ही पास नहीं था। थोड़ी भी जानकारी रखने वाले नागरिक जानते हैं कि पूरे राज्य में ऐसे दर्जनों धार्मिक स्थल हैं जिनके कागजों में खामियां हैं और यह भी सब जानते हैं कि डायोसिस के पदाधिकारी किस तरह अपने निजी कारणों से सरकार की गोद में बैठे हैं। 
वह इमारत टूटी और किसी भी तरह से विरोध का स्वर नहीं उठा। पन्नालाल अरुण पन्नालाल शहरी क्षेत्र से अधिक अंदर काम करते बताए जाते हैं। वे कहते हैं कि उनके पीछे हजारों लोग हैं पर उनकी गिरफ्तारी के बाद ऐसा कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई असल में सरकार व्यवस्था यह देखना चाहती है कि जब जंगलों में विकास के नाम पर क्रॉनिक पूंजीवाद को सब कुछ सौंपा जाएगा तो अंदर काम करने वाले क्या प्रतिक्रिया देंगे तो पहले शहर से इन्हें ही उठाओ कारण कोई भी हो व्हिस्ल ब्लोअर के पक्ष में कौन आता है। कहां से आता है सब पता चल जाएगा। शहरी क्षेत्र में तकनीकी जासूसी बेहद आसान है जंगल में यह भी हो सकता है अब सरकार को यह पता चल गया है कि जो लोग स्वयं को एक्टिविस्ट कह रहे हैं उनके पीछे कोई नहीं है और यदि है तो सामने आने की हिम्मत नहीं करता। 
दिसंबर 2025 आपको याद होगा किस तरह राजधानी रायपुर में सांताक्लास को सड़क पर तोड़ा गया था। इस बार दिसंबर 2026 में देखिएगा ईसाई धर्म के मानने वाले किस तरह घरों के भीतर त्यौहार मनाएंगे और अंडे वाला केक भी बनाएंगे तो पहले अपने नेताओं से अनुमति ले लेंगे। कुल मिलाकर उनके सामने दो विकल्प है पहले या तो अपने वर्तमान नेतृत्व के अंगूठे के नीचे रहे या फिर दिमागी नक्सली की टीम में गिने जाएं और आइसोलेट होने तैयार रहे।