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शिक्षा विभाग में अधिकारियों ने ही बना रखी है युद्ध की टुकड़ियां

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बिलासपुर, 15 मई 2026।
जिला शिक्षा अधिकारी बदलता है पर गिरोह को मिलता है लगातार काम। यह समाचार नहीं है यह है शिक्षा विभाग में चल रही एक क्रोनोलॉजी इस विभाग में जिला शिक्षा अधिकारी का पद रसूखदार है। और इस पद को प्राप्त करने के लिए शाम, दाम , दंड भेद सब चलता है। कहा जाता है जो व्यक्ति इस पद पर आने को इच्छुक होता है वह पदस्थ व्यक्ति के खिलाफ एक टीम बनता है उसे टीम में कुछ आरटीआई एक्टिविस्ट, कुछ कानून के जानकारी, कुछ सूचना व्यवसाय और कुछ लाविंग करने वाले। और मामला सूचना संकलन से प्रारंभ होता है। दूसरा चरण विभाग की गलतियों पर बार-बार रीट पिटीशन का लगाना होता है। इसके साथ प्रारंभ होता है लाविंग का खेल। यदि गेम के बीच चेकमेट हो गई तो निजाम बदल जाता है। तो चेश का यह बोर्ड कुछ दिन के लिए हट जाता है। कुछ ही दिन के बाद प्यादे बदल जाते हैं और गेम फिर से शुरू होता है। 
अब देखे हम इस विभाग में वर्तमान में जिला पंचायत के एक पूर्व सदस्य इन दोनों बड़े क्रांतिवीर बना रहे हैं। ये क्रांतिवीर पहले एक मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के आरटीआई कार्यकर्ता थे। और उसे समय इनका निशाना प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना थी। जब तबा कुछ ज्यादा ही गर्म हो गया तो इन्होंने उसे राजनीतिक दल से दूरी बना ली, उसे समय भी यह कसम खाते थे कि जिन विषयों को ये उठा रहे हैं परिणाम तक पहुंचाएंगे पर ऐसा कुछ नहीं हुआ राज्य में सत्ता परिवर्तन हुआ महोदय जिला पंचायत के सदस्य बन गए तब भी इन्होंने प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क परियोजना के भ्रष्टाचार पर कुछ नहीं कहा। अब महोदय का प्रिय विषय शिक्षा विभाग है तो ये जानकारियां इसी विभाग का कौन सा पुराना जिला शिक्षा अधिकारी बता रहा है यह ध्यान दिया जाना चाहिए। 
विभाग का भ्रष्टाचार, विभाग के ही असंतोष से बाहर आ रहा है। फिर चाहे वह घोटाला मेडिकल बिल का हो, अनुकंपा नियुक्ति का हो, पीएफ भुगतान का हो या खरीदी का यहां पर लंबे वेतन को प्राप्त करके केवल राजनीति ही होती है।