24hnbc
ऐसी शिक्षा का मकसद ही क्या है
- By 24hnbc --
- Thursday, 28 May, 2026
24hnbc.com
बिलासपुर, 28 मई 2026।
शिक्षा की मौजूदा व्यवस्था में रचनात्मकता को कुचला जा रहा है। कक्षाओं में उत्तर माननीय कृत लिखने कहा जाता है। इससे स्वतंत्र सोच विकसित करने की स्थिति खत्म हो रही है। यह शिक्षा कारखाने की असेंबल लाइन के समान है। जहां एक से उत्पाद बनते है। आज देश में औसतन रोज दो युवा आत्महत्या कर रहे हैं। 2014 के बाद से एक दो नहीं अभी तक 86 परीक्षाओं के परिचय आउट हुए हैं और युवा एक ऐसे जाल में फंस गया है जहां प्रणाली ना तो कौशल विकसित करती है और ना ही नवाचार को प्रोत्साहित करती है। बल्कि छात्रों को एक सांचे में डालकर औसत जीवन की ओर धकेल रही है।
हम मैकोले को गाली देते हैं कि उसकी शिक्षा व्यवस्था ने बाबू पैदा किया और हमने ऐसी शिक्षा व्यवस्था बनाई जहां हम डिलीवरी बॉय पैदा कर रहे हैं। हमने कभी भी ऐसी व्यवस्था नहीं बनाई कि देश की युवा पीढ़ी शिक्षित भी बने और अपने पसंद के क्षेत्र में निपुण भी बने। हमारी शिक्षा प्रणाली अमीर और गरीब के बीच की खाई को और बड़ा कर रही है। आमिर बच्चे बेहतर संसाधनों के साथ अतिरिक्त कोचिंग करते हैं जबकि गरीब परिवार का बच्चा सीमित अवसरों में संघर्ष करता है। बॉलीवुड की पिक्चरों को ही देखें 3 ईडियट्स, तारे ज़मीन पर, सफलता से बेहतर उत्कृष्टता का संदेश देती है। लेकिन समाज और परिवार अभी भी प्रतिशत और रैंकिंग की दौड़ में फंसा है। मछली को पेड़ पर चढ़ने की परीक्षा देकर उसकी बुद्धिमत्ता का अंकन किया जा रहा है और इसे न्य कहा जाता है। स्नातक में से आधे से अधिक नौकरी के योग्य नहीं पाए जाते, निरंतर सीखने की इच्छा की कमी उजागर हो रही है। याद करें राजस्थान में चपरासी, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के 53000 पदों की भर्ती के लिए 25 लाख युवाओं ने आवेदन दिए थे उनमें से 85% उम्मीदवार स्नातक, स्नातकोत्तर, बीटेक और पीएचडी थे। आईआईटी जैसे संस्थानों में भी व्यक्तिगत रुचि और क्षमता को नजर अंदाज किया जा रहा है।


