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घोटाले ही घोटाले मिल तो ले दर्रीघाट पटवारी से....

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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर। पूर्व में बिलासपुर जिले का बिल्हा ब्लॉक जमीन घोटालों के लिए जाना जाता था इन दिनों यही हाल मस्तूरी का है। भारतीय जनता पार्टी शासनकाल में भदौरा के जमीन घोटाले को कौन नहीं जानता तब समूचे विपक्ष ने बिलासपुर से लेकर रायपुर तक भदौरा भूमि कांड पर ना केवल धरना प्रदर्शन किए बल्कि पत्रकार वार्ताओं की झड़ी लगा दी नेहरू चौक पर धरना प्रदर्शन हुए तत्कालीन जिला कांग्रेस अध्यक्ष अरुण तिवारी ने खुली जीप में बैठकर उस समय के मंत्री स्थानीय विधायक को 10:00 से 5:00 खुली बहस की चुनौती दे रखी थी। इन मामलों पर एफआईआर भी हुई और कुछ लोगों को बचाते हुए सजा भी हुई। कहते हैं कि पूरे भूमि घोटाले में कांग्रेस के एक नेता का भी हाथ था तभी तो भदौरा भूमि घोटाले का एक अभियुक्त जो पटवारी था नौकरी चले जाने के बाद एक कांग्रेसी बिल्डर के यहां काम करते देखा जा सकता है। भदौरा घोटाले की पूरी गैंग इन दिनों दर्रीघाट में खेल कर रही है बताते हैं कि एक राजनीतिक दल के प्रवक्ता का पुत्र और देवरीखुर्द क्षेत्र का पार्षद पार्टनरशिप में इस क्षेत्र में पट्टे की जमीनों का डायवर्सन करा कर जो कि नियमित: नहीं हो सकता टुकड़ों में बेचने का काम कर रहे हैं। हाल ही में खसरा नंबर एक तो 150/18 में डी एस हटने और फिर अचानक जोड़ने के बीच रजिस्ट्री हुई पुख्ता जानकारी है कि रजिस्ट्री में जिस चेक क्रमांक का जिक्र है वह चेक खाते में जमा नहीं किया गया है ऐसा लगता है कि डी एस जोड़े जाने का खेल हुआ तो तत्काल रजिस्ट्री करा ली गई क्रेता विक्रेता के बीच मिलीभगत है दिखावे के लिए चेक जारी किए गए हैं किंतु खाते में जमा नहीं किए गए इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय तक की गई है। एसडीएम ने जांच टीम भी बनाई थी जांच प्रतिवेदन आज तारीख तक नहीं मिला है जांच चलते 3 माह से ज्यादा हो चुका है जांच के दौरान डी एस कैसे जोड़ दिया गया। दर्रीघाट में जमीनों की खरीदी बिक्री के पीछे राजनैतिक आरोप प्रत्यारोप भी लगते है और एक नेता दूसरे नेता के विरुद्ध षड्यंत्र भी करता है ।