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आज नहीं तो कल जाएगा निजी हाथों में, नेता खोज रहे अपनी-अपनी भूमिका

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बिलासपुर, 2 जुलाई 2026। 
बिलासपुर के बेलतरा विधानसभा क्षेत्र स्थित सुपर स्पेशलिटी अस्पताल आरोप प्रत्यारोप का गढ़ बन रहा है या यूं कहे की जनता के असली मुद्दों को छोड़कर दोनों राजनीतिक दल अपने अपने स्तर पर, इस 200 करोड़ के अस्पताल में होने वाली बंदरबांट में भूमिका निभाना चाहते हैं। इसे संयोग नहीं कहा जा सकता की कांग्रेस के जो नेता विजय केसरवानी, सिध्दाशु मिश्रा और महेंद्र गंगोत्री और दूसरी ओर से बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला सभी छात्र नेता रहे हैं। और कोनी इनके छात्र नेतागिरी का मैदान रहा। एक दूसरे के पैंतरों से यह अच्छी तरह वाकिफ हैं।
बिलासपुर की छात्र राजनीति में छात्रों के मुद्दे कम शिक्षा व्यवस्था की ठेकेदारी में भूमिका को यहां के छात्र नेताओं ने खूब तलाशा है। गुरु घासीदास विश्वविद्यालय रहा हो या शहर के अन्य कॉलेज एक समय था की उनमें प्रवेश के इच्छुक छात्र कालेज भवन न जाकर छात्र नेता के घर के आसपास खड़े होते थे। या फिर उसे ठिए पर जाते थे जहां छात्र नेता पाया जाता हो। जानकार बताते थे हर छात्र नेता के कद के अनुसार उनके लिए प्रवेश की सीट आरक्षित होती थी। धीरे-धीरे छात्र राजनीति का पाशा पलटा और शैक्षणिक संस्थानों में चुनाव बंद हो गए। फिर भी सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 ने पढ़ाई के अतिरिक्त सब करने वाले युवा नेताओं को इस अधिनियम के दम पर राजनीति का एक नया रास्ता खोला। कुछ छात्र नेता चुनाव लड़कर निर्वाचित जनप्रतिनिधि बन गए, कुछ को उनके राजनीतिक पार्टी के संगठनों में पद मिल गए और कुछ ने एसईसीएल, एनटीपीसी में नौकरी पा ली।
बिलासपुर में कुछ बड़े अस्पताल हैं उनमें अपोलो, सिम्स, और अब सुपर स्पेशलिटी की गिनती होती है। सिम्स के भ्रष्टाचार को कौन नहीं जानता जिला अस्पताल की कब्र पर निर्मित यह मेडिकल कॉलेज अपने भीतर अनगिनत घोटाले को सजा कर रखा है। सिर्फ एक भर्ती घोटाले की बात करें। तमाम जांच दर जांच के बाद भी कार्यवाही नहीं हुई। अपोलो एसईसीएल और अपोलो का ज्वाइंट वेंचर हो सकता था पर उसे समय के कोयला मंत्री चाबी वाले पासवान ने क्षेत्रीय भावनाओं को ना समझते हुए एसईसीएल प्रबंधन को जो इशारे किए तो बिलासपुर की जनता का एक बड़ा हक खत्म हो गया। अपोलो के जन भागीदारी को लेकर कभी-कभार कोई नेता अपनी सुविधा अनुसार बयान दे देता है जब एक फर्जी डॉक्टर दमोह मध्य प्रदेश से गिरफ्तार हुआ तब भी नेताओं ने अपोलो प्रबंधन की ईट से ईट बजाने के बहुत से वादे किए यह संयोग ही है की अपोलो भी बेलतरा विधानसभा में है।
सरकारी अस्पताल पीपीपी मॉडल पर चला जाएगा यह बात कोई अनोखी नहीं है आज नहीं तो कल जाएगा। डबल इंजन की सरकारों ने अस्पताल ही नहीं स्कूल, पुल पुलिया, रेलवे स्टेशन, हवाई अड्डे, बस अड्डे सब तो बचा है असल लड़ाई उसे पीपीपी मॉडल में भूमिका तलाश करने की है। और बिलासपुर के नेता अब उसे राह पर चल पड़े हैं।