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राष्ट्रीय नेताओं ने अधर में छोड़ दिया अपने छत्तीसगढ़ नेताओं को

एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष नोबल वर्मा के लिए विकट स्थिति करें तो क्या....?

24hnbc.com
बिलासपुर, 18 अक्टूबर 2023।
इंडिया के गठबंधन दल एनसीपी की छत्तीसगढ़ में हालत खराब पार्टी भले ही इससे इनकार कर दे पर इसके छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष ही अब निराशा हो चले हैं। एक तरफ छत्तीसगढ दूसरी बाद चुनाव मैदान में उतरी आप पार्टी के नेता और कार्यकर्ता उत्साहित है। उसके दिल्ली और पंजाब के नेता लगातार छत्तीसगढ़ दौरा कर रहे हैं और अब तक दो दर्जन से अधिक नाम की घोषणा की जा चुकी है, यहां तक की बहुजन समाज पार्टी और जेसीसीजे भी चुनाव मैदान में डट गई है। पर दूसरी ओर एनसीपी जिसने 2003 में छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार निपटने में बड़ी भूमिका निभाई थी वह अभी तक दिखाई नहीं दे रही है।। यहां तक की उसके स्थानीय नेता मीडिया से दूरी बनाकर चल रहे हैं। साथ ही पार्टी के पास कहने लायक कुछ बचा न होने के कारण प्रदेश प्रभारी भी कॉल यू लेटर का संदेश देकर भाग रहे हैं।
चुनाव के 2 साल पहले से एनसीपी की छत्तीसगढ़ इकाई ने मेहनत करनी चालू कर दी थी और बिलासपुर में कार्यक्रम सम्मेलन में स्वयं प्रदेश अध्यक्ष नोबल वर्मा ने आकर मीडिया को भी कहा था कि पार्टी छत्तीसगढ़ के चुनाव में जिन भी विधानसभा में प्रत्याशी उतारेगी वे निश्चित रूप से प्रभावी होंगे।
सब जानते हैं नोबल वर्मा ना केवल चंद्रपुर विधानसभा सीट से चुनाव जीते रहे साथ ही कैबिनेट मंत्री भी थे। इस बार भी वे चंद्रपुर विधानसभा सीट से तैयारी कर रहे थे। भाजपा ने जब से संयोगिता सिंह जूदेव के नाम का ऐलान किया नोबल वर्मा को अपनी संभावनाएं बेहतर दिखाई देने लगी है। कारण कांग्रेस इस सीट से अपने विधायक का टिकट कट रही है इस विधानसभा सीट पर बसपा की प्रभावी उपस्थिति है। 2018 के चुनाव में इस सीट पर जेसीसीजे और बसपा के गठ जोड़ में बसपा का उम्मीदवार खड़ा हुआ था और भाजपा की हार मैं उसकी बड़ी भूमिका थी। नोबल वर्मा के लिए चंद्रपुर सुरक्षित सीट है पर एनसीपी छत्तीसगढ़ चुनाव पर ध्यान ही नहीं दे रही है। कुछ लोगों ने ऐसे संकेत दिए थे कि उच्च स्तर पर कांग्रेस और एनसीपी के बीच एक या दो सीट को लेकर समझौता भी हो रहा है पर अब उसमें देर हो चुकी है। 
चंद्रपुर के नोबल वर्मा समर्थकों को लगता है कि चुनाव में उन्हें अवश्य उतरना चाहिए कांग्रेस विधायक से नाराजगी और जुदेव के बाहरी होने के कारण नोबल वर्मा को लाभ प्राप्त होगा। पर एनसीपी की तरफ से अब तक कोई पहल नहीं हुई है ऐसे में नोबेल वर्मा कैंप अपने नेता पर निर्णय लेने के लिए दबाव बना रहा है। कुछ ऐसी ही स्थिति बिलासपुर से एनसीपी के प्रदेश प्रवक्ता निलेश बिसवास की भी है। उनके समर्थकों को लगता था कि पार्टी अच्छा परफॉर्म करेंगी और प्रदेश प्रवक्ता ने शहर में अपना और प्रदेश अध्यक्ष नोबल वर्मा का आउटडोर मीडिया कैंपियन भी चला रखा था। यहां तक की अपने स्तर पर एक विजन डॉक्यूमेंट भी निकाल पर अब ये भी उहापोहा में फंस गये। यदि 24 घंटे के भीतर एनसीपी के ऊपरी इकाई ने कोई निर्णय नहीं लिया तो एनसीपी छत्तीसगढ़ के नेताओं के पास वैकल्पिक व्यवस्था के अतिरिक्त कोई चारा नहीं रह जाएगा।