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बलौदा बाजार जिले का चर्चित हनी ट्रैप कांड कहानी अभी भी है शेष

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बलौदा बाजार/बिलासपुर, 18 अप्रैल 2026।
बलौदा बाजार जिले को जिन दो घटनाओं ने चर्चित बना के रखा है उनमें से एक अग्निकांड है और दूसरा है हनी ट्रैप। कलेक्ट्रेट जलने की चर्चा बाद में करेंगे आज हनी ट्रैप की बात करते हैं। 15 अप्रैल को भारतीय जनता पार्टी के नेता संकेत शुक्ला ने हनी ट्रैप मामले में सरेंडर कर दिया। बलौदा बाजार सामाजिक, राजनीतिक, न्यायालीन, पत्रकारिता सभी की कलई खोलने वाला यह मामला 30 मार्च 2024 को उजागर हुआ था और अब अप्रैल महीने का 2026 में। असली कहानी किरदारों की भूमिका अभी भी पूरी तरह बाहर नहीं आई है। इस मामले में सबसे कमजोर कड़ी पांच महिलाएं जो जेल गई किसी की भी शैक्षणिक योग्यता ऐसी नहीं थी कि वे संगठित अपराध के मास्टरमाइंड होने का फक्र पाती है। सभी महिलाएं दसवीं से ज्यादा पढ़ी नहीं है आरोपित आशीष शुक्ला पत्रकार हैं और जिले में काफी सक्रिय रहते थे उन्हीं से जुड़ा एक नाम अधिवक्ता महान मिश्रा का है जेल गए जमानत पर बाहर हैं। अंजोर मांझी पुलिस के आरक्षक हैं जेल गए इसी तरह पूरे कांड में एक और पुलिस कर्मचारी जो निरीक्षक स्तर के हैं अमित तिवारी न्यायालय से कुछ राहत पा गए। पूरा कांड प्रारंभ में बेहद सरल नजर आता था पर बाद में कड़ियां जुड़ती चली गई और मला एक तरफ रोचक हुआ तो दूसरी तरफ इस मामले ने समाज के कथित प्रभावशाली लोगों की कलई खोल दी। कोई वर्ग नहीं बचा जिससे समाज बड़ी उम्मीद करता है कि वे गलत का साथ नहीं देंगे। संवेदनशील मामलों को समाज हित में उठाएंगे पर यहां तो लोकतंत्र के चार खंबे ढ़हते नजर आए। अंत में जिन नेताजी ने सरेंडर किया है वे जिस पार्टी से वास्ता रखते हैं उसके तो चाल चरित्र और चेहरे के बारे में बड़ी-बड़ी बातें की जाती थी। इस पार्टी की महिला नेत्रियां अन्य राजनीतिक दल के मामलों में बड़ी-बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस करती है और स्लोगन देती है हमने बनाया था हम ही सवारेंगे पर हकीकत कुछ और निकल रही है। इस पूरे कांड की जांच के दौरान जिले ने एक से अधिक पुलिस अधीक्षकों का तबादला देखा पर अच्छी बात यह रही की इस स्तर पर किसी को बचाने की स्थितियां होती दिखाई नहीं दी। 
पूरे मामले में 4 एफआईआर दर्ज है कुछ पर चालान आ चुका है कुछ पर शेष है लिहाजा कहानी में अभी ट्वीट्स है।