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वेदांता का ट्रैक रिकार्ड बताता है कि वे कितने ईमानदार हैं

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बिलासपुर, 20 अप्रैल 2026। 
छत्तीसगढ़ के नवगठित सक्ति जिले के अंतर्गत वेदांता पावर प्लांट के हादसे में मृतकों की संख्या 21 हो गई घायल कर्मचारी 36 है। बताया जाता है कि सैकड़ो की संख्या में वेदांता से काम छोड़कर कर्मचारी अपने घर चले गए। अभी एक महीने पूर्व ही मध्य प्रदेश के सिंगरौली में अडानी की विद्युत कंपनी में दुर्घटना हुई थी और आकर्षित ग्रामीणों ने प्लांट पर हमला कर दिया था। यहां वैसा कुछ नहीं हुआ हां मजदूरों ने नौकरी छोड़कर घर जाना बेहतर समझा। वेदांत पर इसके पहले भी आरोप लगाते रहे हैं उसकी सहायक कंपनी बालको, कोरबा 2009 चिमनी दुर्घटना 45 मजदूरों की मौत को कौन बोलता है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने 2022 में बालकों वेदांता समूह औद्योगिक कचरा प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल उठाए थे। अपशिष्टों का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंध न होने के कारण भूजल और मिट्टी में प्रदूषण बढ़ गया है। 
राज्य की बड़ी आबादी प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर है इसलिए वेदांत जैसी कंपनियों के मामले केवल कानूनी मुद्दे नहीं है। बल्कि आम नागरिकों की जीवन से जुड़े हुए हैं। छत्तीसगढ़ के अलावा वेदांत की उड़ीसा की कालाहांडी, रायगढ़ा, नियमगिरि की पहाड़ों में बॉक्साइट खनन वाला मामला भी अंतरराष्ट्रीय ख्याति पा चुका है। लांझीगढ में अल्युमिनियम रिफाइनरी प्लांट का मामला चर्चित है। तमिलनाडु में तूतिन कोरेन मैं वेदांत की ईस्टर लाइट, कॉपर यूनिट के खिलाफ 2018 में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुआ पुलिस फायरिंग में 13 लोग मारे गए। तमिलनाडु सरकार ने ईस्टर लाइट कॉपर प्लांट को स्थाई रूप से बंद कराया गया। गोवा में वेदांता ग्रुप की सहायक कंपनी शीशा गोवा के खिलाफ भी पर्यावरण उल्लंघन के गंभीर मामले हैं। 2012, 2018 सुप्रीम कोर्ट ने खनन कार्य को बंद कराया छत्तीसगढ़ में औद्योगिक दुर्घटनाओं में तेजी देखी जा रही है राज्य खनिज समृद्ध है और यहां बड़ी कंपनियां आ रही है उनमें वेदांता, जिंदल, अडानी सुर्खियों में है। रायगढ़, अंबिकापुर, बलौदा बाजार, सक्ति, जांजगीर, कुर्ला जैसे कई उदाहरण है। जहां पर औद्योगिक सुरक्षा पर्यावरण मानव संसाधन के मानकों पर कंपनियां खड़ी नहीं उतरती और नियमों को लागू करने वाली एजेंसियां की कार्य कुशलता भी संदेह के घेरे में है या यह कहीं की राज्य की एजेंसी हो या केंद्र की उनके हाथ उनके आकाओ से बंधे रहते हैं। या फिर डबल इंजन के पेट में ईंधन डालकर उसे चुप कराया जाता है। दोनों स्थिति में मानव संसाधन को अपूरणीय क्षति होती है और उससे बड़ी क्षति पर्यावरण को होती है पर इन मामलों को गंभीरता के साथ कोई नहीं उठाता आप तो यहां तक है कि वेदांता दुर्घटना के बाद कुछ मीडिया संस्थानों में बड़ी विज्ञापन देखे जा सकते हैं।