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त्रिपाठी हत्याकांड का आया फैसला नागरिक हतप्रभ
- By 24hnbc --
- Thursday, 29 Oct, 2026
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बिलासपुर, 30 अक्टूबर 2026।
न्याय होना और न्याय होते देखना, प्रक्रिया ही सजा है भारतीय न्याय शास्त्र में यह दो अबूझ पहेलियां हैं। इसी तरह जमाना तो नहीं हुई पर मामले में बरी हो जाना और हत्या जैसे मामले में 24 घंटे में जमानत हो जाना 302 में नामजद आरोपी बनना और बगैर गिरफ्तार हुए प्रकरण से बाहर हो जाना यह सब बिलासपुर के आसपास की ही सच्चाई है। आज बिलासपुर सत्र न्यायालय से एक चौंकाने वाला फैसला आया संजू त्रिपाठी हत्याकांड के सभी 22 आरोपी 20 पुरुष और 2 महिला जिसमें मृतक का भाई मुख्य मास्टरमाइंड बताया गया था सभी सबूत के अभाव में बड़ी हो गए। इस प्रकरण के एक-एक व्यक्ति को गिरफ्तार करने के बाद जमानत के लिए बहुत पापड़ बेलने पड़े लगता था प्रकरण बहुत मजबूत है पर 2022 के मामले में आज जब 2026 में फैसला आया तो आम नागरिकों को सरप्राइज था।
इसी तरह अभी 7 दिन पूर्व पड़ोसी जिले मुंगेली में नाबालिक के हत्या के मामले में पुलिस ने आरोपियों को पकड़ा और माननीय न्यायालय ने उसी दिन उन्हें जमानत दे दी। नागरिक हतप्रभ रह गए यहां तक की दूसरे दिन जब सामाजिक संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया और जांच एजेंसी जिला प्रशासन को लगा कि मामला संवेदनशील हो जाएगा तो जमानत के खिलाफ अपील की गई अपील मान्य हुई जमानत निरस्त हो गई और आरोपी जेल चले गए, पर जांच एजेंसी की भद्द तो पिट गई। वैसी ही भद्द बिलासपुर में पिटी जब हत्या कांड में 22 के 22 आरोपी बरी हो गए सबूत के अभाव में जब कोई भी मामले में आरोपी पकड़े जाते हैं तो जांच एजेंसी के अधिकारी प्रेस वार्ता जरूर करते हैं और बताते हैं कि एकदम पुख्ता सबूत है और सब को सजा मिलेगी। पर यही दावे कोर्ट में टिकते नहीं हैं हमने एक और लाइन लिखी है हत्या के मामले में एफआईआर में नाम था पर नामजद आरोपी गिरफ्तार तो नहीं हुआ और प्रकरण के चालान में उसका नाम नहीं था अथवा जांच एजेंसी ने उसे पूछताछ के बाद ही छोड़ दिया। यह मामला बिलासपुर के तोरवा थाना क्षेत्र का है। अर्थ यह है कि सब कुछ संभव हो सकता है। ऐसी तेरी माया यह माया कौन है क्योंकि भारतीय दर्शन में तो ब्रह्म सत्य है और माया जगत है और यही माया खेल करती है क्योंकि ब्रह्म तो निराकार है सत्य है और सत्य रूप बदले तो असत्य नहीं रहता माया तो सब करती है ऐसे में देखने लायक रहेगा की बिलासपुर पुलिस अपनी छवि को बचाने के लिए सत्र न्यायालय के आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती देगी या माया बड़ी निकलेगी।

