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पहचानें असली रावण को

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बिलासपुर, 19 अक्टूबर 2026। 
नवरात्रि अवकाश के पहले क्रिश्चियन फोरम के अगुवा अरुण पन्नालाल को हाई कोर्ट से बेल मिल गई और जेल से रिहाई हो गई। निकालने के बाद रायपुर में कई स्थानों पर उनका स्वागत हुआ वे अंबेडकर प्रतिमा भी गए और चर्च जाकर उन्होंने उन्हें षडयंत्र पूर्वक जिन्होंने जेल भेजा उन्हें माफ करने की बात कही... और यह भी कहा की वे माफ कर रहे हैं पर उनके द्वारा शुरू की गई मुहिम बंद नहीं होगी। अरुण पन्नालाल को पता है कि यदि उन्होंने अपनी मुहिम को विराम दे दिया तो व्यवस्था उन्हें समाप्त कर देगी। 
संघर्ष से जीने की उम्मीदें हैं, और यही कारण है कि अरुण पन्नालाल ने संघर्ष का रास्ता चुन लिया है। नवरात्रि के अंतिम दिन और रावण दहन के पहले हम अरुण पन्नालाल के अध्याय को जानबूझकर लिख रहे हैं असल में पूरे देश के भीतर इन दिनों जो कुछ चल रहा है इसका कारण शिक्षा क्षेत्र में पतन, बेरोजगारी और महंगाई यह तीन कारण भारत में आंदोलन को जन्म दे रहे हैं तो फ्रांस और इटली में भी दे रहे हैं। सीधी बात है की जिस देश की सरकार राष्ट्रवाद, श्रेष्ठ वाद और क्रॉनिक पूंजीवाद के रास्ते पर चलेगी वहां संसाधनों का बंटवारा इतना असमान हो जाएगा की अवस्था फैलेगी। भारत में पिछले 10 सालों में यही हुआ टूल्स के जरिए हर उस जायज आंदोलन को दबा दिया गया जिसके आधार पर सुधार हो सकते थे। किसानों का आंदोलन, श्रमिकों का आंदोलन, एनआरसी इन्हें विदेशी फंडिंग, राष्ट्रवाद और बाहरी ताकतों द्वारा बात कर अनसुना दिया गया और सत्ताधारी दल ने एक तरफ क्रॉनिक पूंजीवाद को बढ़ाया और सत्ता में हमेशा बने रहने के लिए एक ऐसा लाभार्थी वर्ग तैयार किया जो उसे ही वोट करें। जब पिछले लोकसभा चुनाव में उसका या फार्मूला लड़खड़ाया तो उसने वोटर चुनने का समीकरण बना लिया यही वह समीकरण है जिसके दम पर देश के गृहमंत्री अभी से बता रहे हैं कि अगले लोकसभा चुनाव में भी वे ही सत्ता में रहेंगे। ऐसे में सवाल उठता है कि कल जब हम रावण दहन करने जाएंगे तो हमारा लक्ष्य क्या रहेगा। देश की बड़ी आबादी को सम्मान पूर्वक शिक्षा, रोजगार और मौलिक अधिकार चाहिए उनके लिए पर्यावरण बचाना बेहद जरूरी है अन्यथा जब जल, जंगल, जमीन पर आवाम का नहीं किसी पूंजीपति का कब्जा होगा तो हम केवल लाभार्थी ही कहलाएंगे जबकि देश का संविधान हमें हम भारतवासी बनता है और हमें हर हाल में यही बना है लाभार्थी नहीं।