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C.N.I. में करोड़ों का भ्रष्टाचार, S.I.T जांच की मांग
- By 24hnbc --
- Sunday, 04 Oct, 2026
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महाराष्ट्र, 4 अक्टूबर 2026।
C.N.I. के मॉडरेटर परितोष कैनिंग ने हाल ही में दुनिया भर के CNI सदस्यों के लिए यूट्यूब पर एक अच्छा संदेश प्रसारित किया। CNI के इतिहास में पहली बार मॉडरेटर ने मसीही शिक्षाओं के माध्यम से CNI की गतिविधियों के संबंध में संदेश दिया, जिसका हम स्वागत करते हैं। लेकिन वास्तविक स्थिति इससे बिल्कुल अलग है।
हमारे आरोप / जांच के प्रमुख बिंदु
* संपत्ति की बिक्री: CNI के कुछ बिशप और सिनॉड के अधिकारी धार्मिक कार्यों के बजाय संपत्ति बिक्री, डेवलपमेंट और बैठकों के नाम पर लाखों रुपये का अपव्यय (फिजूलखर्ची) कर रहे हैं, जिससे मसीही समाज को भारी नुकसान हो रहा है।
* नागपुर म्यूर अस्पताल एवं पुणे वाडिया अस्पताल:
* नागपुर म्यूर अस्पताल की लगभग 800 करोड़ रुपये की संपत्ति को कम मूल्य का दर्शाकर CNI के बिशप, मैनेजिंग डायरेक्टर और अन्य पदाधिकारियों द्वारा आपस में करोड़ों रुपये बांटने की चर्चा है। इसकी गहन जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।
* पुणे वाडिया अस्पताल (45,000 वर्ग फुट) और प्रेस्टिज पॉइंट की बिक्री के लिए तीसरे पक्ष (थर्ड पार्टी) के व्यक्तियों—प्रेम मसीह, वी. जे. शिरवया और बिशप एम. यू. कसाब—को पावर ऑफ अटॉर्नी देकर करोड़ों रुपये का भ्रष्टाचार किया गया। इसकी जांच अब तक क्यों नहीं हुई? क्या संपत्तियों को बाजार भाव से कम दिखाकर बेचा गया? क्या इसमें अंडर-हैंड डीलिंग (अंदरूनी लेन-देन) हुई? इससे मिले करोड़ों रुपये कहां हैं? इसका हिसाब मॉडरेटर को देना चाहिए।
* जालना मामला: फ्रेजर बॉयज स्कूल, डगलस गर्ल्स स्कूल, कालीकुर्ती और कई अन्य संपत्तियां जो 'चर्च ऑफ स्कॉटलैंड' की थीं, उनके फर्जी दस्तावेज तैयार कर समाज के साथ धोखाधड़ी करते हुए उन्हें बेचा गया। आरोप है कि मराठवाड़ा धर्मप्रांत के नाम पर बिशप एम. यू. कसाब और मराठवाड़ा धर्मप्रांत के पदाधिकारियों ने इस राशि का व्यक्तिगत उपयोग किया। जालना मिशन अस्पताल में हुए करोड़ों के भ्रष्टाचार की शिकायत CNI सिनॉड में दर्ज कराने के बावजूद आज तक कोई जांच नहीं हुई। फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी देकर चर्च ऑफ स्कॉटलैंड की संपत्तियों को बेची और विकसित की गई। जालना, नागपुर, मुंबई, कोल्हापुर और पुणे की संपत्तियों की बिक्री/डेवलपमेंट में हुए भ्रष्टाचार की SIT जांच होनी ही चाहिए।
* कोईमार मिशन ट्रस्ट: कोल्हापुर, निपानी, पंजाब और उत्तर प्रदेश में स्थित करोड़ों की संपत्तियों को फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी बनाकर बेचा या विकसित किया गया। वेतनभोगी कर्मचारी होने के बावजूद प्रेम मसीह और वी. जे. शिरवया (मैनेजिंग डायरेक्टर) को पावर ऑफ अटॉर्नी कैसे दी जा सकती है? बिक्री से जमा हुई राशि और उसका ब्याज मिरज मेडिकल सेंटर, वेंगुर्ला मिशन अस्पताल तथा अन्य संस्थानों को दिया जाना चाहिए। मॉडरेटर कैनिंग को इस विषय में पहल करनी चाहिए। पर्याप्त धन उपलब्ध होने के बावजूद मिरज मेडिकल सेंटर को चलाने के लिए 5 करोड़ रुपये का कर्ज लेने का क्या कारण है? लोगों को संदेह है कि अंधेरे में रखकर अस्पताल को बेच दिया गया है। मॉडरेटर कैनिंग को इस पर स्पष्टीकरण देना चाहिए।
* मिरज मेडिकल सेंटर: यह एक प्रतिष्ठित अस्पताल है और मेडिकल कॉलेज की मंजूरी मिलने के बावजूद बिक्री से आए पैसे का इस्तेमाल मेडिकल कॉलेज के लिए नहीं किया गया। प्रेम मसीह, बिशप कसाब, वी. जे. शिरवया और अस्पताल प्रबंधन देखने वाले कोल्हापुर डायोसिस काउंसिल के पदाधिकारियों के खिलाफ मॉडरेटर कैनिंग आपराधिक मामला दर्ज कराएं। मिरज मेडिकल अस्पताल के कर्मचारियों को वेतन क्यों नहीं दिया गया? मॉडरेटर और CNI के बिशपों ने दुबई में बैठक के लिए जो पैसा खर्च किया, उसे कर्मचारियों के वेतन और अस्पताल के रखरखाव में क्यों नहीं लगाया गया? दुबई में किन-किन बिशपों, पदाधिकारियों और सदस्यों ने संपत्तियां खरीदी हैं, इसकी भी जांच होनी चाहिए।
* मुंबई विल्सन कॉलेज जिमखाना: अधिकार न होने के बावजूद फर्जी अधिकार पत्र के माध्यम से किराएदार को देकर शर्तों का उल्लंघन किया गया, जिसके कारण सरकार द्वारा संपत्ति को कब्जे में लेने की जानकारी मिली है। इसके पीछे CNI के पदाधिकारियों की मिलीभगत से करोड़ों रुपये लेने की चर्चा है।
* अन्य राज्यों में संपत्ति बिक्री: राजस्थान, जयपुर, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश (इंदौर, भोपाल, जबलपुर), आगरा, इलाहाबाद, कोलकाता आदि स्थानों पर बिशप कैनिंग, सिनॉड के पदाधिकारियों, बिशप और मैनेजिंग डायरेक्टर ने पावर ऑफ अटॉर्नी देकर UCNITA और CNI चर्च यूनियन में शामिल मिशनरी संस्थाओं की संपत्तियों को बेचकर करोड़ों रुपये एकत्र किए। यह राशि मिशनरी संस्थाओं को न देकर व्यक्तिगत संपत्ति बनाने में इस्तेमाल की गई। इन सभी मामलों की SIT के माध्यम से जांच होनी चाहिए।
हमारी मांगें:
* मॉडरेटर परितोष कैनिंग तुरंत एक स्वतंत्र जांच समिति का गठन करें।
* संबंधित अधिकारियों—जैसे वी. जे. शिरवया, प्रेम मसीह, संजय सिंह और उनके साथियों—द्वारा किए गए भ्रष्टाचार की जांच की जाए तथा उन्हें तुरंत CNI के पदों से कार्यमुक्त/बखास्त किया जाए।
* महाराष्ट्र सरकार और भारत सरकार एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन करके इस पूरे भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच करे।
यदि जांच शुरू नहीं की गई, तो समस्त मसीही समाज की ओर से हम आजाद मैदान (मुंबई), जंतर-मंतर और CNI भवन (नई दिल्ली) पर तीव्र आंदोलन करेंगे।

