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रावण दहन के पहले कितने मोहरे निपटेंगे यह देखने लायक होगा
- By 24hnbc --
- Saturday, 03 Oct, 2026
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बिलासपुर, 4 अक्टूबर 2026।
बिलासपुर शहर की राजनीति में रावण दहन पर विवाद कोई पहली बार नहीं हुआ है पर इस बार का विवाद और पूर्व के विवादों में बड़ा मोटा अंतर है। जब दशहरा पर्व में रावण दहन नगर निगम की एम आई सी से प्रस्तावित हुआ तब शहर में सबसे पुराना रावण दहन का कार्यक्रम रेलवे परिक्षेत्र का था जानकार बताते हैं कि लगभग वहां 1925 से रावण दहन चला आ रहा है। स्थानीय नागरिकों के लिए निगम के नेतृत्व में यह परंपरा शुरू की जब तक कांग्रेस का विधायक रहा दशहरे पर कोई मनमोटाओ था ही नहीं फिर समय आया शहर विधायक भाजपा का सरकार कांग्रेस की और आमतौर पर मेयर भी भाजपा का ही होता था तो सब कुछ ठीक-ठाक था। हां इस बीच में यह जरूर हुआ कि शहर के अलग-अलग क्षेत्र में रावण दहन की संख्या बढ़ गई। सरकंडा, एसईसीएल, बस स्टैंड, इस तरह संख्या बढ़ी किस क्षेत्र का रावण दहन कौन करेगा इसे लेकर एक तरफ प्रतिस्पर्धा और दूसरी तरफ राजनीति एक साथ चलती थी। जब चुनाव नजदीक होते थे तो टिकट के दावेदार इसे अपना व्यक्ति लोकप्रियता का पैमाना बना लेते थे तो इस प्रतिस्पर्धा का लाभ रावण दहन समितियां को मिलता था जो नेता जितना सहयोग करेगा वह उतनी जगह रावण दहन करेगा और जिस नेता को जितना ज्यादा रावण दहन करने के लिए मिलेगा उसके टिकट का दवा उतना ज्यादा मजबूत माना जाएगा। यह प्रतिस्पर्धा भारतीय जनता पार्टी में नहीं हो पाती थी क्योंकि बिलासपुर विधानसभा की टिकट एक नेता अमर अग्रवाल के अतिरिक्त कोई और दावेदार था ही नहीं। कांग्रेस में टिकट के कई दावेदार होते थे तो वहां रावण दहन के लिए प्रतिस्पर्धा भी हो जाती थी। और अब बात 2026 के रावण दहन की।
जिले में पांच विधानसभा क्षेत्र हैं जिला मुख्यालय से दूरी के चलते दो विधानसभा को माइनस कर दे कोटा और मस्तूरी शेष तखतपुर, बिल्हा और बेलतरा के राजनीतिक समीकरण इस तरह है कि बिलासपुर विधानसभा को प्रभावित करते हैं और यही कारण है कि नगर निगम का रावण इस बार राजनीति के चेस बोर्ड पर टकरा रहा है। चेस के खेल में तो दो खिलाड़ी होते हैं पर यहां रावण की चेस पर कई खिलाड़ी हैं। कुछ खिलाड़ी नौकर साहब भी हैं और बेचारा रावण दहन तो होता है, होगा पर उसके पहले कितने मोहरे आपस में निपटेंगे यह देखने लायक रहेगा।

