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मेडिकल उपकरणों पर 20% मुनाफा, आखिर यह लुट कहां जाकर रुकेगी
- By 24hnbc --
- Thursday, 30 Apr, 2026
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बिलासपुर, 1 मई 2026।
आम उपभोक्ता के लिए एक बड़ा प्रश्न है, दवा एवं मेडिकल उपकरणों की ऐसी कीमत तय की जा सकती है जो कारखाना लागत से 4 से 5 गुना अधिक हो। फिलहाल अस्पताल और रिटेलर इनको लागत से 10 से 25 गुना अधिक पर बेच रहे हैं। एमआरपी कैसे तय होगी... मेडिकल दवा और उपकरणों के मूल्य से जब आक्रोश पैदा होगा तो इसे कौन संभालेगा। क्या नर्सिंग होम के अंदर भारतीय न्याय संहिता की एक धारा लिख देने से समस्या का समाधान हो जाएगा। अस्पताल एवं खुदरा विक्रेता कुछ मेडिकल उपकरणों एवं दावों की फैक्टरी मूल्य या आयात लागत की तुलना में 25 गुना अधिक कीमत मरीज से वसूल रहे हैं। प्राइवेट अस्पताल मरीजों को निचोड़ने की दुकान बन गए। हद तो तब हो जाती है जब दवा निर्माता कंपनियां ही, इसकी शिकायत करने लगे तो समझा जा सकता है की हेल्थ केयर सेक्टर में मुनाफा कमाने की प्रवृत्ति कितनी बे लगाम है।
दवा विक्रेता कंपनियों ने 2 साल में कई बार केंद्र को पत्र लिखा है। इस संबंध में बैठकें भी हुई है। दवा कंपनियों ने न्यूनतम खुदरा मूल्य एमआरपी के ऊपर कमाई जाने वाले मुनाफे की सीमा तय करने की मांग की है। केंद्र इन गुजारिशें को गंभीरता से नहीं लेता। अस्पतालों और रिटेलरों के मुनाफे पर लगाम लगाना उसकी प्राथमिकता नहीं है लगभग 300 दवा निर्माता कंपनियों का संगठन एसोसिएशन ऑफ इंडियन मेडिकल डिवाइसेज एमआईएमईडी का कहना है कि मरीज को अंधेरे में रखा जा रहा है। लागत मूल्य विक्रय मूल्य या के अंतर पर प्रदर्शित नहीं है। ड्रेसिंग, बैंडेज और प्लास्टर कारखाना लागत की तुलना में 4 से 5 गुना अधिक पर बेचे जा सकते हैं जबकि वर्तमान में यह 10 से 20 गुना अधिक कीमत पर बेची जा रहे हैं।
संगठन ने नेशनल फार्मासीटीकल अथॉरिटी को भी पत्र लिखा है। केवल आवश्यक दावों की कीमत तय करने से काम नहीं चलेगा। आखिर यह लुट कहां जाकर रुकेगी।


