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बस के पीछे की लंबी कहानी
- By 24hnbc --
- Saturday, 22 Aug, 2026
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बिलासपुर, 22 अगस्त 2026।
सरकारी अनुदान से चलने वाला विशेष बच्चों के स्कूल की यह बस पुराना बस स्टैंड क्षेत्र में खड़ी रहती है। इस बस को क्रय करने के लिए भी अनुदान ही जारी हुआ था। तनख्वाह मेमोरियल स्कूल पहले विद्यानगर क्षेत्र में तनख्वाह मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा संचालित था तब समाज कल्याण द्वारा प्रदत यह वाहन स्कूल के सामने खड़ा रहता था। बिलासपुर के तत्कालीन कलेक्टर अम्बलगन के समय विशेष बच्चों के इस स्कूल का अनुदान प्रारंभ हुआ। अभी हाल ही में वर्ष 2025 में तनख्वाह मेमोरियल समिति ने इस स्कूल के संचालन से हाथ खींच लिए और इस स्कूल का संचालन श्याम सुंदर तिवारी नाम के एक व्यक्ति की संस्था को प्राप्त हुआ है। यह नाम इसलिए विशेष है कि पूर्व में मां डिंडेश्वरी समिति द्वारा घरौंदा परियोजना का संचालन श्याम सुंदर तिवारी के नेतृत्व में ही होता था और स्थिति या आ गई थी कि लाभार्थी को अनाज का दाना तक नसीब नहीं था। तब भी तत्कालीन कलेक्टर ने मां डिंडेश्वरी समिति को ब्लैक लिस्टेड किया और घरौंदा का संचालन दूसरी समिति को दिया। कुछ दिन शांत रहने के बाद श्याम सुंदर जी ने मिशन अस्पताल के आईसीयू वाले क्षेत्र में वृद्ध आश्रम खोला और उसे समय समाज कल्याण के संयुक्त संचालक हरमन खलखो और तत्कालीन कलेक्टर से लाखों की धनराशि आकस्मिक निधि से ली स्वीकृत पद में स्पष्ट लिखा था कि धनराशि का समायोजन नियमित अनुदान से किया जाएगा। राशि प्राप्त होते ही वृद्ध आश्रम बंद हो गया और कुछ दिन तक सुंदर जी शांत रहे पर फिर से एक नई समिति बनाकर फिर विशेष बच्चों के स्कूल को प्राप्त कर लिया और अनुदान मिलने लगा। यह बस स्पष्ट बताती है कि परियोजना का भवन उसे स्तर का नहीं है कि इस बस को परियोजना संचालक स्थल के पास खड़ा किया जा सके।


