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हैंडलूम डे पर द वायर की रपट से छत्तीसगढ़ में फैली बेचैनी

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बिलासपुर, 18 अगस्त 2026। 
छत्तीसगढ़ सरकार का नेशनल हैंडलूम डे पर रैंप वॉक अब विवाद के साये में है। द वायर न्यूज़ की रपट के अनुसार रैंप वॉक करने वाली समर्पित नक्सली महिलाओं का कहना है कि इस कार्यक्रम के लिए उन्हें से पूर्व में कोई अनुमति नहीं ली गई थी। बस्तर से रायपुर ले जाने के लिए जो कारण बताया गया था वह सिलाई सीखने का था। द वायर में यह रिपोर्ट संतोषी मरकाम की बाई लाइन से छपी है। यह रिपोर्ट कहती है कि आत्म समर्पण करने वाली माओवादी महिलाओं ने बताया कि इसके लिए उन्हें कोई धनराशि नहीं दी गई। जबकि सरकारी अधिकारियों ने कहा है कि पैसा उनके खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर हुआ है। महिलाओं ने कहा कि उन्हें तो केवल एक बैग और कुछ कपड़े मिले। द वायर की विस्तृत रिपोर्ट में बताया गया है कि किस तरह बस्तर में पुनर्वास का काम चल रहा है। समर्पित माओवादियों के साथ पुनर्वास के साथ कैसा व्यवहार है इस रिपोर्ट में सामाजिक कार्यकर्ता बेला दास का भी वर्जन है। इस रिपोर्ट के छपने के बाद बस्तर में पुनर्वास के मामलों की चर्चा दोबारा चालू हो गई है। बताया जाता है कि पूर्व में भी पुनर्वास के नाम पर अधिकारियों ने किस तरह की लापरवाही की और सरकारी कोष को नुकसान पहुंचा। हैंडलूम डे पर राज्य की राजधानी में जो कार्यक्रम हुआ उसे प्रदेश और भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने बढ़ चढ़कर सफल बताया था और इसे बस्तर में नक्सलवाद के खातमे और महिला स्वतंत्रता के सफल रूप में दिखाया जा रहा था।