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करोड़ों का नोटिस होने के बाद क्यों थम गया ई-नीलामी का पहिया

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बिलासपुर, 19 मार्च 2019। 
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक बड़े ऋणी से निभाते हैं निजी संबंध पंजाब नेशनल बैंक से नजूल सीट नंबर 14 मिशन रोड, इंडियन पब्लिक स्कूल के पीछे आजाद नगर वार्ड नंबर 18 के एक नजूल लीज भूखंड 45000 स्क्वायर फीट पर ऋण राशि लगभग 21 करोड़ की ई- नीलामी 6 मार्च को घोषित थी पर बैंक के अनुसार यह नीलामी रोक दी गई। ऋण डिफाल्टर इस राशि पर सेटलमेंट कर रहे हैं। आम सूचना में उपलब्ध बैंक अधिकारी का नाम दुर्गावती कुमारी के नंबर पर बात करने पर उन्होंने यह जानकारी दी सेटलमेंट राशि कितनी है का उन्होंने जवाब दिया वह बैंक और ऋणी के बीच निजी संबंध है। नहीं बता सकते बैंक सार्वजनिक क्षेत्र का, पैसा आम नागरिकों का और लोन की राशि बैंक और ऋणी के बीच निजी संबंध, उक्त भूखंड नजूल का है और यह फ्री होल्ड नहीं है। ऐसे में लोन के पूर्व नजूल की सहमति आवश्यक है। इस संदर्भ में जब नजूल शाखा से जानकारी ली गई तो उन्होंने खसरा संधारण का सीधा कोई जवाब नहीं दिया और बात को घुमाया। 
बिलासपुर जिले में बैंकों के लंबे चौड़े लोन बैंक डिफाल्टर के कुछ चर्चित मामले हैं जो बैंक और ऋणी के बीच आओ खेले मिलकर लोन लोन पर टाई हो जाते हैं। बैंक दी गई ऋण राशि से कम पर मान जाते हैं और सेठ ऋण राशि से पूंजी निर्माण करते हैं। पहला उदाहरण छत्तीसगढ़ मॉल उसलापुर साल 2017 का मामला है बैंक वो इसे डिफाल्टर घोषित किया। मॉल पर दो बैंकों का लोगों ने था जो लगभग 113 करोड़ था। भौतिक कब्जा अखबारों में बड़े कार्यवाही के दावों के बाद मामला गायब हो गया। रिकवरी के बड़े एजेंट बताते हैं कि यह पूरा मामला मूल्य राशि से कम में सेटल हुआ। 
दूसरा मामला राशि स्टील भनेश्वर का है यहां पर भी बड़ी लोन राशि थी अखबारों की सुर्खी तो नहीं बनी पर यह मामला न्यायालय तक गया वाद में उल्लेखित राशि 146679953.83 है। इस प्लांट का ना केवल बोर्ड आफ डायरेक्टर बदला और ऋण पर भी सेटलमेंट हुआ है। और वसूली के लिए घोषित राशि से सेटलमेंट अमाउंट बहुत नीचे है।
 बिलासपुर का तीसरा बैंक लोन ठगी का मामला विश्वजीत भौमिक, सत्यजीत भौमिक का है यहां तो लोन की राशि 800 करोड़ से ऊपर बताई जाती है। कुल मिलाकर आम ईमानदार ऋणी साधारण खातेदार अपनी पाई-पाई के हिसाब में परेशान है। न्यूनतम जमा राशि से नीचे जाते हैं खाते पर सरचार्ज लग जाता है। तीन किस्त जमा न करने पर सरफैसी एक्ट लग जाता है और वन टाइम सेटलमेंट करने पर भी कुछ ₹100 की भी मरौअत नहीं मिलती है। उल्टे करोड़ के कर्जदार के साथ बैंक निजी संबंध बनाते हैं और उन्हें प्रोटेक्शन देते हैं।