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भक्त बता रहे हैं की लकड़ी पर पका खाना सर्वश्रेष्ठ है

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बिलासपुर, 15 मार्च 2026।
वस्तु स्थिति को स्वीकार न करना यही बीजेपी की सबसे बड़ी पहचान है। किसी का इस्तीफा नहीं होगा चाहे मामला एंपस्टीन का हो देश में गैस सिलेंडर का हाहाकार है और सरकार इसे स्वीकार नहीं करती यही है इंडिया का न्यू नॉर्मल, कोविड में भी हमने देखा ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं थी। उसे समय जो कोई भी मरा वह अन्य कारणों से हुआ होगा क्योंकि उसे समय भी सरकार ने बताया कि ऑक्सीजन की कमी से हुई मौत का कोई आंकड़ा उसके पास नहीं है। एक ही दिन में चार प्रेस कांफ्रेंस और भाजपा शासित राज्यों के मंत्रियों का कहना की सब कुछ सामान्य है। एलपीजी गैस सिलेंडर की कोई कमी नहीं है पैनिक ना हो तो क्या लोग अपना शौक पूरा करने के लिए लाइन में लगे हैं, धक्का मुक्की कर रहे हैं, और मारपीट कर रहे हैं। यदि सिलेंडर की कमी नहीं है तो अयोध्या में राम रसोई क्यों बंद हो गई। होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे क्यों बंद हो रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट की कैंटीन में में कोर्स का खाना क्यों बंद हो गया। भारतीय रेलवे अपनी कैटरिंग सर्विस क्यों कर रही है। 
मोदी सरकार ने उज्ज्वला योजना के तहत मुफ्त में रसोई गैस के कनेक्शन बांटे स्वच्छ ऊर्जा अपने का अभियान शुरू किया तो उसी हिसाब से देश में भंडारण की व्यवस्था क्यों नहीं की गई। आपूर्ति श्रृंखला को बेहतर क्यों नहीं बनाया गया। सब जानते हैं की खाड़ी से गैस आने में 22 दिन लगते हैं तो तीसरे दिन ही तीसरे दिन ही कमी कैसे होगा कमी कैसे हो गई। पूरा खेल बड़े उद्योगपति को लाभ पहुंचाने का है। बगैर कमी हुई तीसरे दिन ही कीमत क्यों बढ़ गई असल में सरकार में बैठे मुंशीयों ने तय किया की किस लाभ पहुंचाना है। और पूरी कार्य योजना बन गई इसे ही इन्होंने आपदा में अवसर कहा था और इसी का वे लाभ लेते हैं। आयात पे से निर्भरता कम कि नहीं अपना उत्पादन भी नहीं बढ़ाया 10 साल पहले भारत अपनी जरूरत का 41% एलजी आयात करता था। अब यह बढ़कर 60% हो गया है। अधिकतर आयात इस क्षेत्र से होता है जहां जंग चल रही है। कोई समस्या तो है तभी तो तभी तो एस्मा लगाया तो इसे स्वीकार करने में दिक्कत क्या है। देश में हर दिन 80000 टन एलजी की जरूरत है। स्टोरेज क्षमता सिर्फ डेढ़ लाख टन की है। उपभोक्ता बढ़ गया तो स्टोरेज क्षमता क्यों नहीं बढाई क्या इसके लिए भी जवाहरलाल नेहरू ही जिम्मेदार हैं। 
देश को पकड़ा मॉडल पर चलने का परिणाम अब दिख रहा है। नाश्ते के खेलों के पीछे अब लकड़ी का चूल्हा जल रहा है इसे ही कहते हैं वेद की ओर लौटो और अब ज्ञानी लकड़ी कि आंच पर पकी हुई चीजों का गुणगान करेंगे। कहेंगे गैस की रोटी तो गैस बनती थी। लकड़ी पर पका खाना ही सर्वश्रेष्ठ है पर वे भूल जाएंगे की ही हसदेव के जंगल भी तो अदानी ने काट लिया है तो एलजी का संकट भी उसे ही लाभ पहुंचा रहा है और खाड़ी का युद्ध भी उसे ही पूछ रहा है।