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रोज करें 8 बजें का इंतजार कभी भी मोदी जी हो जाएंगे स्व घोषित चक्रवर्ती सम्राट

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बिलासपुर, 2 नवंबर 2026। 
स्वतंत्र भारत के इतिहास में चुनाव आयोग और मतदाता सूची को लेकर इतने लंबे समय तक ऐसा कौन सा विवाद है जैसा अभी चल रहा है। भाजपा अब चुनाव में कितना ही जीते उसकी जीत पर सवाल स्थाई है। भारतीय जनता पार्टी और उसकी कमान संभाल रहे नरेंद्र मोदी चुनाव और लोकतंत्र का पाखंड क्यों ढों रहे हैं। वे 8:00 बजे आए और सीधा का दिन की 2047 तक लोकतंत्र, चुनाव, नागरिक आजादी, अभिव्यक्ति की आजादी और मीडिया उन सब को स्थगित किया जाता है जो विकसित भारत के उनके सपने में बाधक हैं। मदर ऑफ़ डेमोक्रेसी को लोकतंत्र नहीं चाहिए विकास चाहिए इसलिए 1947 तक सब स्थगित। अनुशासन पर्व मनाएंगे अराजकता को हटाएंगे और विकास केवल पथ संचलन से होगा। और वोट ही क्यों पढ़ना भी माना है क्योंकि पढ़ोगे तो पूछोगे देश में जिस तरह से हजारों पत्र पत्रिकाओं का प्रकाशन बंद हुआ है उससे यही लगता है कि अखबार सवाल पैदा करता है, पत्रिका सवाल पैदा करती है और किताब नागरिकों के दिमाग में खुराफात पैदा करती है। तभी तो भारत में 1 साल में 80 हजार से ज्यादा पत्र पत्रिकाएं के रजिस्ट्रेशन सूची से बाहर हो गए। और इन्हें हटाए जाने का कारण प्रेस एंड रजिस्ट्रेशन का प्रीयोडीकल एक्ट बना दूसरा तरीका पोस्टल तरीके से सस्ते में पत्रिकाएं घर तक पहुंचने वाली सुविधा बंद हुई। 
आप अपने अपने शहरों में घुमिया रेलवे स्टेशन से एएच व्हीलर गायब हो गए। बस स्टैंड का स्वरूप छोटा हो या राष्ट्रीय, अंतर राज्यीय कहीं भी पत्र पत्रिकाओं की दुकान दिखाई नहीं देगी। और रिहायती डाक दरों पर पत्रिका भेजने की प्रणाली कुछ इस तरह बदली गई की पत्रिकाओं का घर पहुंचना बंद हो गया तो पढ़ने लिखने और अकाल मंदो से मोदी सरकार की चिढ़ नजर आती है जो आदमी पढ़ेगा नहीं वह वो जाने का नहीं और जो जाने का नहीं वो पूछेगा नहीं। और जो पूछता नहीं है उसके लिए सरकार और प्रचार में अंतर नहीं है और यही है नया भारत जो मोबाइल पर चलने वाला अंगूठा छाप है। व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी को पड़ता है रियल देखा है भक्ति भाव से अपने-अपने सत्य को जपता है। सत्य शोध से होने वाला विकास सिकुड़ता जा रहा है। 
किताब और वोट का क्या रिश्ता है मतदाता सूची से जहां नाम गायब होने की शिकायतें हैं वहीं बाजार से पत्रिकाएं भी गायब हैं। इसलिए हम कहते हैं कि चुनाव की आवश्यकता ही क्या है क्यों लोकतंत्र में मीडिया आजाद रहे और क्यों कोर्ट और अन्य संवैधानिक संस्थाएं खुली रहे। 2014 में शुरू हुआ रामराज और अब अमृत काल जो असल में हिंदू शाही है सब कुछ खत्म कर रहा है। मतदाता सूची की सफाई एस आए आई के माध्यम से की जा रही है और मोदी जी स्वयं को हिंदू सभ्यता संस्कृति के आधार पर चक्रवर्ती घोषित करने वाले हैं।