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नाली निगम की, और दस्तावेज रखने का काम नागरिकों का

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बिलासपुर, 1 नवंबर 2026। 
वैसे तो पूरे नगर पालिक निगम बिलासपुर में काम के तरीके बेहद खराब हैं पर उनमें भी जोन क्रमांक 3 की हालत तो इतनी खराब है कि वे किसी को नोटिस भेजने के पहले यह भी नहीं देखे की क्या वास्तव में उसे नोटिस दिया जा सकता है। यह मामला 27 खोली क्षेत्र विकास नगर में एक नाली समस्या को लेकर जुड़ा हुआ है। 
पहले मोहल्ले के कुछ लोगों ने मिलकर पड़ोसी निवासी कौशिक के द्वारा नगर निगम की नली पर अवैध निर्माण की शिकायत की, निष्पक्ष कार्यवाही ना होते देख सर्वाधिक पीड़ित व्यक्ति को उच्च न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। अब निगम ने न्यायालय में जो आवेदक है उसे ही एक नोटिस थमा दिया। नोटिस में कहा गया कि वो अपनी भूमि स्वामित्व संबंधित दस्तावेज खसरा, नक्शा, सीमांकन अभिलेख, नाली निर्माण की स्वीकृति एवं स्वीकृत मानचित्र अन्य संबंधित अनुमतियां, अनापत्ति प्रमाण पत्र प्रस्तुत करें। 
अब सवाल उठता है कि न्यायालय में जो आवेदक गया है वह तो किसी प्रकार का निर्माण कर ही नहीं रहा है, ना ही नाली निर्माण ना ही नाली में कोई परिवर्तन कर रहा है तो वह दस्तावेज क्यों दे। निगम का अधिनियम 1956, धारा 302, 307 2 के प्रावधान उसे व्यक्ति पर लागू होते हैं जो बिना अनुमति अथवा अवैध रूप से भवन निर्माण कर रहा हो और यहां तो आवेदक कोई निर्माण कर ही नहीं रहा है तो उसे नोटिस किस बात का। दूसरा नाली निर्माण नगर निगम ने स्वयं कराया। अधिनियम की धारा 82 (1) ग सार्वजनिक नाली निगम में ही निहित है तो नाली निर्माण की स्वीकृति, प्राक्कलन, स्वीकृत मानचित्र, कार्य आदेश, एमबी जैसे दस्तावेज निगम के पास ही होने चाहिए या निगम यह कहना चाहता है कि जिस मोहल्ले में जो नाली बनी है निगम नाली बनाने के पहले मोहल्ले के सब भवन स्वामियों को दस्तावेज दे देता है तभी तो जरूरत होने पर मोहल्ले वालों से मांग रहा है कुल मिलाकर निगम के जोन 3 में नदी का पानी उल्टा बह रहा है।