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डायोसिस का दोहरा मापदंड देखना है तो स्वागत है छत्तीसगढ़ में

जिसने पूछा उसे कर दिया बाहर और जो चुप होकर खड़ा था बाहर उसका कराया धर्मांतरण

24hnbc.com
बिलासपुर, 31 अक्टूबर 2026। 
2001 में बनी छत्तीसगढ़ में ईसाई समाज के 90 लोग अपने ही समाज से बहिष्कृत होने का दंश झेल रहे हैं और ईसाई समाज के दर्जनों धर्माचार्य पर रोज आरोप लगता है कि वो धर्मांतरण कर रहे हैं। यह बहुत बड़ा विरोधाभास है यह 90 लोग जिन्हें छत्तीसगढ़ डायोसिस ने सीएनआई की ग्रीन बुक के आधार पर बहिष्कृत कर दिया, वे तीसरी पीढ़ी के ईसाई हैं। मतलब उन्होंने न केवल बाइबल को पढ़ा होगा समझा होगा और ईसाई समाज के मर्म सेवा और शिक्षा की विरासत को देखा भी है। आखिर इन 90 लोगों ने ऐसा क्या किया कि धर्म सत्ता ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया। 
बातचीत और पूरे घटनाक्रम पर नजर डालने पर पता चलता है कि ये 90 लोगों ने अपने धर्माचार्यों से कुछ नहीं बहुत कुछ पूछने की हिम्मत दिखाई तो हर शनिवार इतवार जो धर्माचार्य दर्जनों नहीं सैकड़ो की संख्या में धर्मांतरण करते हैं क्या वे ईसाई धर्म में आने वालों को यह बताते हैं कि यहां पूछना माना है। केवल शीश झुकाकर सुनना है तथ्य बताते हैं कि कोटा, तखतपुर, परसा पानी जैसे दो दर्जन चर्चो में धर्मांतरण हो रहा है और ये सब चर्च कहीं ना कहीं सीएनआई से जुड़े हुए बताए जाते हैं। 
बिलासपुर के एक चर्च का उदाहरण देखिए सिविल लाईन थाना के बाजू में स्थित चर्च का लीज नवीनीकरण नहीं हुआ है बताया जाता है की यह चर्च सीएफसी का है और 1970 में सीएफसी को सीएनआई में मर्ज कर दिया गया था। बाद में सीएनआई मैं कई फुट हुई और 1994 में तो देश की सर्वोच्च अदालत ने तो सीएनआई को विधि शून्य घोषित कर दिया जो अंतिम है। इस चर्च के भीतर तीन से ज्यादा प्रार्थना सभाएं अलग-अलग गुटकी होती है और सबको प्रार्थना का समय प्रशासन ने ही बनता है तो वहीं प्रशासन इस चर्च के लीज नवीनीकरण पर कोई निर्णय क्यों नहीं लेता। आखिर हजारों नहीं लाखों की संख्या में छात्रों को शिक्षा की ज्योति देकर विदा करने वाले स्कूल के खिलाफ प्रशासनिक अधिकारी क्यों हैं यदि धर्म परिवर्तन सच है तो इन स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों छात्रों में से कितनों ने ईसाई धर्म स्वीकार किया इस पर कोई डेटा डायोसिस के पास नहीं है पर प्रति रविवार और शनिवार अलग-अलग चर्च में जो लोग धर्म परिवर्तन करते हैं उनमें से किसी ने भी इन स्कूलों में शिक्षा नहीं पाई सीधा अर्थ है शिक्षा से धर्म परिवर्तन नहीं होता अशिक्षा में होता है और कहीं ना कहीं इसके पीछे कोई लालच होता है। आज छत्तीसगढ़ में ईसाई धर्म की सेवा टूट रही है उनके प्रसिद्ध अस्पतालों की दुर्दशा देखी जा सकती है वही सच्ची सेवा से आज भी सफलता मिलती है का उदाहरण बेलूर का इसी कम्युनिटी का हॉस्पिटल है इस अस्पताल को अजीम प्रेमजी फाउंडेशन ने कई 100 करोड़ की सहायता दी और इससे उलट छत्तीसगढ़ में इस समाज के कथित रहनुमा अपने शरीर पर लाखों का गोल्ड पहनते हैं और खर्चा चलाने अपनी विरासत को बेचते हैं। ‌