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चीर हरण नहीं लोकतंत्र का इन्होंने किया बलात्कार
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बिलासपुर, 24 सितंबर 2026।
केंद्रीय चुनाव आयोग ने मदर ऑफ डेमोक्रेसी का चीर हरण नहीं बलात्कार किया है भले ही शब्दों में कटुता आ जाए पर इतने एक्सपोजर के बाद भी यदि केंद्रीय चुनाव आयोग के आयुक्त के खिलाफ जनता सड़क पर नहीं आती तो यह जनता लोकतंत्र के लायक नहीं है। राहुल गांधी ने तो ट्रॉली भर भर के सबूत दिए थे तब गांदेश ने पत्रकार वार्ता करके कहा था एक हफ्ते में माफी मांगो या शपथ के साथ शिकायत करो। राहुल गांधी अपनी सच्चाई जानते थे वे जानते थे की केंचुआ खुद नहीं बोल रहा यह आवाज किसी और की है इसलिए वे एस ए आर की परते खोलते रहे। और गोदी मीडिया उन्हें नकारती रही पर इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्टर कृतिका डोभाल की 500 वाली गिनती में नहीं थी और उन्होंने अपनी रिपोर्ट का पहला किस्त छाप दिया है। दूसरी किस्त में और क्या होगा इस देश में एक वोट काटने की सजा 7 साल है यदि आयुक्तों के खिलाफ एफआईआर होने लगी तो अंदाज लगे कितने करोड़ एफआईआर होगी और उनकी सजा कितनी होगी।
असल में लोकतंत्र के खिलाफ जिन पांच लोगों ने बलात्कार किया है उनमें तीन आयुक्त और दो लुटियन हैं जो अपने को प्रधान सेवक कहते हैं नॉन बायोलॉजिकल बताते हैं। भारत के पड़ोसी देश में इसी तरह लोकतंत्र का मखौल उडा और वहां के प्रधानमंत्री को भारत ने शरण दी। तो भारत में लोकतंत्र का जो हाल हो गया है जिस दिन जनता सड़क पर उतरेगी तब प्रधान सेवकों को शरण कहां मिलेगी। हिंदू राष्ट्र नेपाल में या एक संभावना इंडोनेशिया भी है। बेहतर होगा न्यायपालिका के मुखिया अब अपनी अपनी गर्दन सीधी करने और भारत के संविधान के अनुसार चलें। तभी लोकतांत्रिक तरीके से सत्ता परिवर्तन होगा। और सबसे ज्यादा जरूरी है पिछले 2 साल में जितने भी चुनाव हुए उन्हें विधि शून्य घोषित किया जाए और दोबारा वे चुनाव हो...।
(वर्तनी की त्रुटि से गांदेश प्रकाशित हुआ है उसे सही करके पढ़ें)

