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वर्मा जी लाए थे मिक्स अचार, खाना किसके साथ था नहीं पता...?

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बिलासपुर, 23 सितंबर 2026। 
साहित्यकार स्वर्गीय श्रीकांत वर्मा के पुत्र अभिषेक वर्मा आज बिलासपुर में मिक्स अचार तो लेकर आ गए पर वे तय नहीं कर पाए की खाना किसके साथ है। लाखों रुपए बैनर पोस्टर पर खर्च करने के बाद आज बिलासपुर में ना तो वर्मा ट्रस्ट का ट्रस्ट बना ना ही शिवसेना का राजनीतिक वजूद। साथ ही एक बार फट चुके पटाखे वहां किसने एकत्र किए यह खोज का विषय है। 
हथियारों का अंतरराष्ट्रीय सौदागर फटाका चयन में इतना फ़ीस्सडी होगा किसी ने सोचा नहीं होगा। रही बात साहित्यकारों की वे तो सम्मान के लिए बैठे ही हैं चाहे राष्ट्र कभी हो या व्यंग्य लेखक हो या कोई और, पत्रकारों को 4:00 बजे जिम होटल में बुलाया गया वही लालच पैदा कर देता है लिहाजा बड़ी संख्या में मीडिया कर्मी पहुंचे थे। आयोजकों ने बड़ी निक नियति से कुछ पदाधिकारीयों को मंच पर स्थान दिया सोचा सब कुछ सह लेंगे पर सामने बैठे मीडिया कर्मियों की टीका टिप्पणी को पदाधिकारी कब तक इग्नोर करते सो उठ खड़े हुए। खैर बाद में जैसी परंपरा है आयोजक हाथ जोड़ ले तो माफी देने में ही बड़प्पन हैं सो पदाधिकारी ने बड़प्पन कायम रखा। 
अभिषेक अपने पापा के कर्मों पर कीटनाशक डालकर लहलहाती फसल की उम्मीद कर रहे हैं पर ऐसा होता कहां है हम जिन्हें एक बार फूटा हुआ पटाखा कह रहे हैं वे यह नहीं कर पाते की कांग्रेस में रहना है, भाजपा में जाना है, स्वतंत्रता सेनानी परिवार बनाना है, प्रकाशक बना है, एनजीओ चलना है या सत्ताधारी दल की आड़ में खड़े होकर जमीन का धंधा करना है। इस चक्कर में आते तो हैं पर मुंह छुपा छुपा कर भागते हैं। कुछ बेहद मीठे ढीट है। कुर्सी पर बैठे ही रहते हैं जिन्हें हम सम्मानित नेता कहते हैं। कल मिलकर चंदे की, गुंडागर्दी की दम पर चलने वाली पार्टी बड़े पूंजीपति का साथ पाकर सोच रही है कुछ कर गुजरेंगे पर अभी तो आरजी का हवा चल रही है और जिसके पास जेन जी नहीं वह किसी भी होटल में खड़ा हो अकेला है।