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उदात चरित्र है नहीं बात करते हैं वसुंधैव कुटुंबकम की
- By 24hnbc --
- Thursday, 08 Jan, 2026
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बिलासपुर, 9 जनवरी 2026।
जब विश्वविद्यालय केंद्रीय हो गया तो मान सम्मान का स्तर भी ऊंचा ही होना तय है। बिलासपुर का गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय एक बार फिर से चर्चा के दायरे में आ गया है। मुद्दा कुलपति प्रोफेसर आलोक चकरवाल द्वारा मेहमान साहित्यकार मनोज रूपन के साथ किया गया व्यवहार है। प्रोफेसर ने तो मेहमान साहित्यकार के साथ दुर्व्यवहार किया। पर हम उसे व्यवहार की श्रेणी में ही रखते हैं। तुलसीदास लिखे गए हैं "आवत ही हरषै नहीं नैनन नहीं सनेह तुलसी तहां न जाइये कंचन बरसे मेह"
अर्थ है कि जिस जगह या घर में आपके आने से लोग प्रश्नन न हों और आंखों में प्रेम ना हो वहां कभी नहीं जाना चाहिए भले ही वहां धन की वर्षा ही क्यों ना हो रही हो। पर अब वक्त है बाजारवाद का विश्वविद्यालय में बुलावा उसे ही दिया जाता है जिसका टीए डीए से लेकर सब कुछ पूर्व निर्धारित होता है। स्थानीय साहित्यकारों की अपेक्षा इस विश्वविद्यालय में पूर्व से ही चल रही थी और इस मुद्दे पर एक से अधिक बार स्थानीय साहित्यकारों ने अपना विरोध दर्ज भी कराया था, इस बार मामला महाराष्ट्र से आए मेहमान के साथ हो गया। बहुत ज्यादा खोज खबर लेने पर पता चल जाएगा की जिन लोगों को विश्वविद्यालय में आमंत्रित किया जाता है उनमें से संघीय विचारधारा के कितने हैं। इससे जुड़ा हुआ एक मामला अटल विश्वविद्यालय का भी है। एक दौर था एक शिक्षाविद को व्याख्यान के लिए बार-बार बुलाया जाता था। जानकारी लेने पर छुपे सूत्रों ने बताया कि उक्त शिक्षा वेद ने नक्सली मामले में एक बार मध्यस्थ करवाई थी। उसी का भुगतान करने के लिए यह रास्ता अपनाया गया। जीजीयू के मामले में बड़ी चर्चा हो रही है पर कोई नहीं पूछता कि इसी विश्वविद्यालय ने तानाशाही का उच्चतम शिखर दिखाते हुए अपने 190 कर्मचारियों का भविष्य अंधकार में धकेल दिया वे देश की सर्वोच्च अदालत से भी जीत कर आ गए पर उन्हें न्याय नहीं मिला। तो विश्वविद्यालय के गलीचे के नीचे ऐसी सैकड़ो कहानी शिशक रही है। यह मामला तो ऑडियो वीडियो में रिकॉर्ड हो गया है तो चर्चा में आ गई।


