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बहिष्कृत नागरिकों का अंतिम प्रयास न्याय नहीं मिला तो, कोर्ट जाने के होंगे बाध्य
- By 24hnbc --
- Thursday, 05 Mar, 2026
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बिलासपुर, 6 मार्च 2026।
ईसाई समाज से निकले गए 50 नागरिकों ने सीएनआई की उस ग्रीन बुक को ही चैलेंज किया है जिसके आधार पर छत्तीसगढ़ डायोसिस के बिशप ने बहिष्कृत किया है। वरिष्ठ नागरिकों ने इस चिट्ठी को, यूनियन मिनिस्टर अमित शाह, कलेक्टर जबलपुर, कलेक्टर रायपुर, मॉडरेटर दिल्ली, सीएनआई सिनौड साथी लीटर की एक कॉपी जांच अधिकारी ईओडब्ल्यू जबलपुर को भी भेजी गई। पत्र का मूल भाव यह है कि जब सीएनआई की कानूनी वैधता ही उच्चतम न्यायालय द्वारा विधि शून्य घोषित हो चुकी है तो उसकी ग्रीन बुक को आधार बनाकर कोई डायोसिस या उसका बिशप अपने ही सदस्यों को समाज से बहिष्कृत कैसे कर सकता है। क्या सीएनआई की कथित ग्रीन बुक भारतीय संविधान को सुपर सीट करती है।
पूरा मामला यह है कि छत्तीसगढ़ डायोसिस के अपंजीकृत चर्च छत्तीसगढ़ डायोसिस बोर्ड ऑफ़ एजूकेशन पंजीकृत के 19 स्कूलों की फीस को नियम विरुद्ध तरीके से अपने पास ट्रांसफर कर रहे थे। जब इस मुद्दे पर कुछ नागरिकों ने जो ईसाई समाज से ही हैं ने पहले समाज के अंदर और बाद में न्यायालय में शिकायतें की तो परेशान होकर डायोसिस के पदाधिकारी ने इन को समाज से ही बहिष्कृत कर दिया। ऐसा एक से ज्यादा बार हुआ अभी वर्ष 2026 अंतिम शनिवार रविवार के दिन बिशप ने फिर से इन्हें समाज के बाहर घोषित कर दिया।
इस बार इन नागरिकों ने अपने समाज के पदाधिकारियों को पत्र भेज कर स्पष्ट कहा है कि अविलंब निर्णय वापस हो अन्यथा इस मुद्दे पर भी वे कोर्ट जाने के लिए बाध्य रहेंगे।


