समाज कल्याण के हमाम में सब हैं ........
यहां ना कोई कोपल ना किसी की वाणी सत्य
- By 24hnbc --
- Tuesday, 23 Jan, 2024
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बिलासपुर, 24 जनवरी 2024।
मामला 13 जनवरी 2019 का है रायपुर जिले के दैनिक समाचार पत्रों में एक समाचार प्रकाशित हुआ समाचार की विषय वस्तु यह थी कि 21 वर्षीय बालिका के साथ स्वैच्छिक संस्था कोपलवाणी वेलफेयर आर्गेनाइजेशन द्वारा संचालित घरौंदा में कार्यरत फिजियोथैरेपिस्ट द्वारा अनाचार किया गया। कार्यालय कलेक्टर रायपुर से आदेश 16-1- 2019 क्रमांक 2659/स्थापना-2019 निकाला। आदेश कहता है कि श्री विपिन मांझी आईएएस अपर कलेक्टर रायपुर की अध्यक्षता में दण्डाधिकारी जांच समिति गठित की जाती है। सदस्य राजीव पांडे, अमित बेक, श्रीमती नोबिला सिन्हा उक्त समिति संयुक्त संचालक समाज कल्याण जिला रायपुर द्वारा गठित समिति के जांच प्रतिवेदन के आधार पर संचालक समाज कल्याण, संचालनालय छत्तीसगढ़ रायपुर द्वारा अधीक्षक/भारसाधक अधिकारी घरौंदा, कोपलवाणी चाइल्ड वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन कोटा रायपुर को जारी नोटिस के बाद विभिन्न बिंदुओं पर सिलसिले बार जांच कर प्रतिवेदन तत्काल कार्यालय को प्रस्तुत करेगा। जांच के चार बिंदु थे प्रश्न उठता है कोपलवाणी संचालित घरौंदा में हुई दुखद घटना के बाद जांच का परिणाम क्या हुआ। उसे समय घरौंदा परियोजना में पुरुष महिला हितग्राही एक ही भवन में आश्रय पाए थे। अब यह स्थिति नहीं है पर इस पूरे प्रकरण की जांच रिपोर्ट प्राप्त नहीं होती है।
तत्कालीन रायपुर कलेक्टर ने समाचार पत्रों में प्रकाशित समाचार पर तत्काल संज्ञान लेकर गंभीरता का परिचय दिया पर समाज कल्याण विभाग में बैठें असंवेदनशील पीव्ही अधिकारी क्या कर रहे हैं। घरौंदा यूनिट जो असहाय लोगों की आश्रय का स्थान था एनजीओ और भ्रष्टाचारियों के बीच शतरंज का अखाड़ा क्यों बन गया। 19 की यह घटना के बाद कोपलवाणी का समाज कल्याण के अधिकारियों के साथ ऐसा क्या बेर हुआ जो मामला उच्च न्यायालय तक आ गया।
घरौंदा केंद्र सरकार की योजना है उसे छत्तीसगढ़ समाज कल्याण के बेहद प्रभावशाली और भ्रष्ट अधिकारियों ने कैसे अपना चारागाह बना लिया। अब कहां की योजना किस एनजीओ से क्यों वापस ली गई मूल्य परियोजना को पहली बार किस-किस एनजीओ को दिया गया पहले अनुदान में कितनी धनराशि दी गई। एनजीओ के चयन का आधार क्या था पर विभाग में बहुत से आरटीआई आवेदन लगे वर्ष 2019-20 में ही रायपुर से प्रकाशित एक दैनिक अखबार के मुख्य पृष्ठ पर समाज कल्याण संबंधित भ्रष्टाचार की बहुत सी खबरें प्रकाशित होती थी। उसे दैनिक अखबार में जो बाद में कुछ ही माह के भीतर बंद हुआ का संचालक स्वयं भी एक एनजीओ चलता था। जिस एनजीओ को यह कथित पत्रकार एनजीओ संचालक चलता था वह एनजीओ एक ऐसे व्यक्ति द्वारा टेक ओवर किया गया जो घरौंदा यूनिट का ही संचालन करता था।
समाज कल्याण विभाग ने उसे दौरान कोपलवाणी के समान ही पीतांबरापीठ को बेन कर दिया था। मंत्रालय और संचालनालय के बीच ऐसे बहुत से तथ्य बिखरे पड़े हैं जिसे यह पता चलता है कि समाज कल्याण के पीव्ही समाज का नहीं स्वयं का और अपने एनजीओ मित्रों का कल्याण कर रहे हैं। जब कभी भी इनके बीच बंटवारे को लेकर मतभेद हो जाता है तब कारनामे बाहर आ जाते हैं। अन्यथा मिली भगत से सब चलता रहता है वर्तमान में एक एनजीओ और संचालनालय के एक अधिकारी के बीच कोर्ट में शह और मात का खेल चल रहा है और ईमानदारी से कार्य करने वाली संस्थाओं को दबाव में डालकर न्यायालय की आड़ में खेल किया जा रहा है।


