24hnbc
पगार तकनीकी पद का, काम रात में सोना, भारतीय रेलवे का क्यों ना हो निजी करण
24hnbc.com
समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर। एसईसीआर साउथ ईस्ट सेंट्रल रेलवे के जोनल मुख्यालय बिल्डिंग के बाजू में स्थित डीआरएम बिलासपुर में ही जब नियमों की इस तरह धज्जियां उड़ रही है तो अन्य रेल मंडलों में नियम का कितना पालन होता होगा इसका अंदाज लगाना बेमानी है। बिलासपुर डीआरएम के अंतर्गत रनिंग स्टाफ को छोड़ ऐसे कई सेक्शन हैं जहां पर जिस व्यक्ति को रेलवे पगार देता है वह व्यक्ति स्वयं के स्थान पर भाड़े के आदमी से काम कराता है यह हाल केवल अनुकंपा नियुक्तिओं का नहीं नियमित पदों पर भी है ऐसी अनियमितता का परिणाम गुणवत्ता से समझौता है उदाहरण के तौर पर जो व्यक्ति वैगन डिपो में वेल्डिंग का काम करता है यदि उसके स्थान पर कोई दूसरा व्यक्ति काम कर रहा है तो कार्य की गुणवत्ता और उत्तरदायित्व कैसे तय किया जा सकता है एक स्थान पर तो यहां तक लापरवाही है कि जिस सेक्शन की सुरक्षा की जिम्मेदारी आरपीएफ की है वहां पर तकनीकी योग्यता वाले पदनाम वाले को चौकीदारी का काम दे दिया गया है। ऐसे 1-2 नहीं दर्जनों उदाहरण हैं इस अनियमितता पर जिम्मेदार अधिकारी कैमरे के सामने कुछ बोलना नहीं चाहते केंद्र सरकार के नियमों के अंतर्गत जानकारी निकालने पर नियमों का हवाला देकर ही जानकारी देने से बचा जाता है। रेलवे में इस तरह की घटनाएं वर्षों से हो रही है और सभी चोर दूसरे चोरों को संरक्षण देते हैं जिन्हें कार्यवाही करनी है वह कमीशन लेकर अपना जेब भरते हैं। हां ऐसे कर्मचारी जब सरकारी नौकरी पर होते हुए निजी व्यवसाय करते हैं तो कुछ जीएसटी केंद्र सरकार को जरूर प्राप्त हो जाता है लेकिन इसमें भी व्यापारी जो असल में सरकारी कर्मचारी है वह डिब्बाबंद सामान के स्थान पर खुले सामान का धंधा करता है जिसका परिणाम की जीएसटी भी पेड नहीं करना पड़ता।


