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अवैध कोल डिपो के कारोबार से एसईसीएल की प्रतिष्ठा को रोज लग रहा धब्बा

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समाचार - छत्तीसगढ़
बिलासपुर। कोयले के व्यापार में वैध - अवैध कोल डंपिंग प्लाटों के कारण एसईसीएल की प्रतिष्ठा को लग रहा धब्बा एक तरफ छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर इस कारण है कि यहां पर एसईसीएल का मुख्यालय है दूसरी ओर बिलासपुर जिले की एक अन्य पहचान भी है और वह यह है कि जिले में चारों ओर कोल डंपिंग प्लाटों में कोयले के साथ मिलावट का जो खेल चलता है । उसमें साल भर के भीतर ही चोर कुबेर बन जाता है जिसे मिलावट का दंड मिलना चाहिए वह शातिर आदमी जिले के भीतर बीएमडब्ल्यू, ऑडी जैसे महंगे वाहनों में सफर करता नजर आता है मजेदार बात यह है कि कोल प्लांट ऐसे लोग अपने अपने नाम से चलाते ही नहीं है नाम किसी और का और मलाई किसी और की यहां तक की जिस व्यक्ति के नाम पर प्लॉट होता है उसे थर्ड पार्टी के नाम से कंपनी में नौकरी भी दे दी जाती है। बिलासपुर जिले में कोयले के अवैध और वैद्य कारोबार पर सीबीआई की रेड भी हुई है इसके पीछे कारण यह है कि खदान से जो कोयला जिस पॉइंट के लिए चलता है लास्ट पॉइंट ने इस बात की कई बार शिकायत की है कि गुणवत्ता में गड़बड़ी होती है क्योंकि मामला केंद्रीय शासन के उपक्रम का है इसलिए सीबीआई सीधे जांच करने आती है कंपनी ने अब तो यह कहना चालू कर दिया है कि खदान से रैक पर लगने के बाद गंतव्य तक पहुंचने में उसकी कोई भूमिका नहीं है। सीधी सी बात है की एसईसीएल कोयले की गुणवत्ता पर केवल रैक तक की जिम्मेदारी लेती है बिलासपुर जिले में रतनपुर बेलतरा मार्ग, जयराम नगर मस्तूरी मार्ग, बिल्हा रोड सिलपहरी बाईपास, सिरगिट्टी बाईपास, महमंद बाईपास अवैध कोल डिपो के लिए जाने जाते हैं। बताया जाता है कि इन क्षेत्रों में अवैध कोल डिपो संचालक संबंधित थानों में सीधे सेटिंग रखते हैं हर महीने केवल थाने को नहीं खनिज विभाग को भी तय रकम दी जाती है ऐसे दलाल नुमा कोल व्यापारियों की महंगी एसयूवी गाड़ियां संबंधित स्थानों पर सेवा के लिए हमेशा तैनात देखी जा सकती है यह किसी ना किसी बहाने पुलिस मुख्यालय और थानों में घूमते पाए जाते हैं। कुछ कोयला दलालों ने तो प्रशासनिक अधिकारियों से रोज मिलने के लिए मीडिया कार्ड भी बनवा डाले कहा जा सकता है कि कोयले के सफेदपोश अपराधी अपने को सुरक्षित करने के लिए उस क्षेत्र का भरपूर आड़ लेते हैं जिसे लोकतंत्र का चौथा खंभा कहा जाता है। रतनपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत 11 सितंबर को एक एफ आई आर दर्ज हुई है जिसमें एक इसी तरह के प्लाट पर 120 टन कोयला पाया गया पुलिस ने त्वरित कार्यवाही की किंतु यह नहीं समझ आता कि अगस्त माह में एक हाईवा संचालक ने जबरदस्ती कोयला खाली करा लेने की नामजद शिकायत दर्ज करवाई किंतु उस शिकायत पर पुलिस सब कुछ जानते बुझते भी कार्यवाही नहीं कर रही ....?