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सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम को खत्म करके बढ़ेंगे कथित विकास के मार्ग पर

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बिलासपुर, 17 अगस्त 2026। 
एक समय सार्वजनिक उद्योग जिन्हें देश का मंदिर माना जाता था व्यवस्था ने उन्हें खत्म करने के लिए योजना बनाई। जिसका परिणाम यह है कि 53 सार्वजनिक उपक्रमों की 533 इंडिपेंडेंट डायरेक्टर की सीट खाली है। बहुत ऐसी कंपनियों में चेयरमैन एढाक सिस्टम पर काम कर रहे हैं। पहले योजनाबद्ध तरीके से इन्हें बीमार किया जा रहा है और जब उनकी बैलेंस शीट खराब हो जाएगी तो इन्हें बेच दिया जाएगा। यदि यही हाल रहा तो 53 कंपनियों के बाद बारी आएगी स्मार्ट सिटी की इन्हें बेचा जाएगा। और फिर बड़ी होगी जिले की, जिला भी बचा जा सकता है इसका तरीका हाल ही में लोकसभा में पेश किया गया। और खनिज संशोधन विधेयक 2026 पास कराया गया। इस विधेयक का विरोध सबसे पहले खनिज संपदा में आगे झारखंड ने किया है जब खनिज पर उसके राज्य का ही कोई होल्ड नहीं बचेगा और पूरी नीति केंद्र तय करेगा तो खनिज की रायल्टी के लिए भी राज्य केंद्र के आश्रित हो जाएंगे। इस विधेयक को पास कर के केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को फिर से चुनौती दी। खनिज संपदा पर राज्य का कितना अधिकार होगा इस पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा स्पष्ट फैसला था और इसी फैसले से केंद्र को झटका लगा था। 14 साल का इतिहास बताता है कि निजीकरण के नाम पर कितने सरकारी उद्योग बेच दिए गए और उसके बाद बारी आई बैंकों की बैंकों से ऋण लेकर ही उद्योगपतियों को लाभ दिया गया और बाद में बैंकों का ही निजीकरण कर दिया गया। यह कम अब और तेज होने वाला है।