15 अगस्त के पहले इसे समझ ले
दया दुख का कारण है, इसे कौन बता रहा है
- By 24hnbc --
- Friday, 07 Aug, 2026
24hnbc.com
बिलासपुर, 8 अगस्त 2026।
बहुत बरस के बाद 2026 का स्वतंत्रता दिवस 2014 के बाद से नए मायने लेकर आया है। प्रयास तो बहुत हुआ कि देश की तरुणाई को धर्म और विभाजन का दोज दे दे कर आरएसएस का कैडर बना दिया जाए पर जिंदगी गणित नहीं है यह सुकून का सौदा है मुनाफे का नहीं। बीज तो इस तरह बोये जा रहे हैं की ऑटो पर लिखा है दया दुख का कारण है। इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता यह कौन सी ताकत है जो सहीशूणता को इस कटुता के साथ खत्म कर रही है जिसे हम सदगुण मानते थे उसे दुख का कारण बताती है।
बौद्ध धर्म की फिलासफी को याद करें वे कहते हैं दुख है दुख का कारण है और दुख निरोध है अर्थात इसे हटाया जा सकता है। दुख का कारण इच्छा, लालसा, अज्ञान दुख हटाने के लिए उन्होंने 8 मार्ग बताएं सम्यक दृष्टि, जिसमें संकल्प बुद्धिमत्ता और प्रज्ञा शामिल है दूसरा सील नैतिक आचरण मतलब सम्यक वाणी, कर्म, आजीविका, समाधि मतलब मानसिक अनुशासन, सम्यक व्यायाम और समाधि। अब देखे की दया दुख का कारण कैसे इसे कौन बता रहा है क्यों बता रहा है। दोनों चीजों पर ध्यान रखना जरूरी है। बताया इसलिए जा रहा है कि जीवन ऐसे सहिष्णुता समाप्त हो जाए सड़कों पर डंडे चले और चलाने वालों को मैदानों में इकट्ठा करके किसने सिखाया यह सब जान रहे हैं। सहीसुडता इस तरह खत्म हुई है की खाकी जिसे टैक्स पेयर की पैसे से तनख्वाह मिलता है हमारे ही बच्चों को डंडे से न केवल मरती है बल्कि गन शॉट पर लेती है और आचरण इतना नीचे गिरती है कि डंडे को करने की जगह डालने के लिए आगे बढ़ती है तो यह चक्र जिन्होंने पैदा किया अब उनकी विदाई का समय आ रहा है।
जिन्होंने धर्म को ढाल बनाकर यह सब किया वह जान ले कि उन्होंने धर्म का शोषण किया और धर्म को संकट में डाला क्योंकि विश्व के परिदृश्य में देखें तो सबसे ज्यादा जनसंख्या तेजी से नास्तिक हो रही है वे जान गए हैं कि धर्म से ना तो आचरण की तरक्की होती है तो क्या भारत के वर्तमान रहनुमा अपने भावी पीढ़ी को नास्तिक के रूप में देखना पसंद करेंगे। भारत की पुलिस बरसों से गुंडा तत्व है और अब अचानक पुलिस रिफॉर्म की बात फिर से आ रही है। तारिक एक ही है पुलिस में 50% आरक्षण पूर्व सैनिक को दे दिया जाए। इससे रिफॉर्म पर होने वाली नौटंकी का खर्चा बच जाएगा अन्यथा भारत देश की वर्तमान सरकार तो 23700 करोड़ रूपया गोवर्धन योजना पर खर्च करने वाली है और इसे ऊर्जा संकट से बचने का तरीका बताया जा रहा है।
एथेनॉल के बाद अब सीएनजी में पहले 3% फिर 5% गोबर गैस मिलाई जाएगी और इसे सीबीजी कंप्रेस्ड बायोगैस कहा जाएगा। गोबर और अन्य कचरो से गैस बनाई जाती है और यह काम हमारे देश में 50 साल से हो रहा है पर 23700 करोड रुपए खर्च करके सरकार बता रही है कि उनके दिमाग में क्या भरा है। और हम इसे सहेंगे यह जानते हुए भी यह 23700 करोड़ रूपया मामा के घर से नहीं बल्कि हमारे टैक्स से आया है। देश की सरकार जिस तरीके से अमेरिका की पिच लागू बन रही है और बारंबार सलेंडर कर रही है तो हमारे पास विकल्प क्या है केवल एक कि हम इन्हें ऐसी विदाई दिन की दोबारा वे लोग कभी ना आए जो स्वयं को अकाउंटब्लिल्टी से ऊपर मांगते हैं और अपना पंजीयन तक नहीं करते। इतना ही नहीं इन्हें विदा करेंगे और इन्हें से तब से हिसाब लेंगे जब इन्होंने पहली बार हमारे देश के संविधान को जलाया था।


