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खुले ज्ञान का नहीं विचारधारा विशेष के लिए छतरी बन रहा केंद्रीय विश्वविद्यालय
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बिलासपुर, 24 अगस्त 2023।
बिलासपुर जिले में तीन सरकारी विश्वविद्यालय हैं और तीनों के खजाने ऐसे विषयों पर कार्यशाला परिचर्चा के लिए खुले हैं जो केंद्र सरकार के चहेते विषय है। उदाहरण के लिए कश्मीर इसी तरह राज्य सरकार का विश्वविद्यालय अटल यूनिवर्सिटी के कुलपति भी एक विचारधारा विशेष को अपने परिसर में बड़ा कैनवस देने से पीछे नहीं हटते। 31 तारीख को सेंट्रल यूनिवर्सिटी गुरु घसीदास विश्वविद्यालय में भारत की महामहिम प्रथम नागरिक का आगमन होने वाला है यह हम सबके लिए गर्व की बात है पर पिछले 10 वर्ष में गुरु घसीदास विश्वविद्यालय का खाका कभी भी उसे सेंटर आफ एक्सीलेंस नहीं बन सका, केंद्रीय विश्वविद्यालय बनवाने के लिए स्थानीय नागरिकों जन प्रतिनिधियों ने जो सक्रियता दिखाई थी सेंट्रल यूनिवर्सिटी बन जाने के बाद विश्वविद्यालय ने सबसे पहले उन्हें ही बाहर किया। उत्तर प्रदेश से आए एक कुलपति ने योग्यता के नाम पर युपीहा लोगों को सामने के दरवाजे से, पीछे के दरवाजे से खूब नियुक्तियां दी। उसी कार्यकाल में जाति उत्पीड़न के आरोप भी विद्यालय के शैक्षणिक स्टाफ पर लगे। अभी इसी माह विश्वविद्यालय में एक व्हाट्सएप ग्रुप के द्वारा विभाजनकारी कार्यक्रम के खिलाफ कुछ छात्रों ने धरना प्रदर्शन किया पर इस प्रश्न का जवाब कोई नहीं देना चाहता यदि विश्वविद्यालय कैंपस में कश्मीर की चर्चा हो सकती है, केरल की चर्चा हो सकती है तो मेघालय, पूर्वोत्तर, मणिपुर, चीन सीमा विवाद के संदर्भ में यही खुलापन क्यों नहीं विश्वविद्यालय को खुले संवाद के लिए छोड़ दिया जाना चाहिए पर गुरु घासीदास इस तर्ज पर ना चलकर एक विचारधारा विशेष को उसके मानने वालों को आशीर्वाद देता है और अन्य विचारधारा को बहिष्कृत करता है ऐसे विवि में ज्ञान का प्रकाश नहीं विचारधारा को पुष्पित करने की कोशिश और पल्लवित करने की कोशिश समाज को कठिनाइयों में डालने के लिए की जा रही हैं।


