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बदस्तूर श्रमिक कर रहा पलायन, गृह ग्राम में नहीं है कोई पंजीयन

बिलासपुर ( 24 एचएनबीसी)। कोविड-19 के सर्वाधिक प्रभाव वाले टाइम में यह पता चला था कि बिलासपुर जिले से हजारों लोग काम की तलाश में बाहर राज्य जाते हैं। किंतु ग्राम पंचायतों में उनकी एंट्री नहीं होती है, जब हजारों की संख्या में श्रमिक वापस आए और जिला प्रशासन को उनके गृह ग्राम पर उन्हें पहुंचाना पड़ा तब यह बात ज्ञात हुई काफी दिनों तक यह लोग बिलासपुर जिले के अपनी-अपनी ग्राम पंचायतों में रहे किंतु अब फिर काम की तलाश में दूसरे प्रदेश जा रहे हैं । पहले ट्रेन बंद थी तब समूह का समूह गांव छोड़कर अन्य प्रदेश जाकर काम करता था। जैसे ही स्पेशल ट्रेन के फेरे कटे श्रमिक रिजर्वेशन करा कर अपनी पसंदीदा जगह काम करने जा रहा है। असल में कोई भी श्रमिक बिना काम किए हुए अपना गृह ग्राम नहीं छोड़ता उल्टे जहां काम करने जाता है वहां से अग्रिम बुलाता है और इस पूरे चेन में श्रमिक सरदार जिसे लेबर कांट्रेक्टर कहा जाता है कि भूमिका महत्वपूर्ण होती है । यही कांट्रेक्टर स्थानीय श्रमिक का आरक्षण कराता है उसे अग्रिम भुगतान करता है और जहां पर काम करना है उस जगह पहुंचाता है बिलासपुर जिले की और आसपास के जिलों की स्थाई समस्या है की काम करने जो नागरिक बाहर जाता है उसका कोई पंजीयन ग्राम पंचायत रजिस्टर में नहीं होता। कोविड में चोट खाने के बावजूद जिला प्रशासन, ग्राम पंचायत, जिला पंचायत, श्रम विभाग ने आपसी रजामंदी के साथ ऐसी कोई व्यवस्था नहीं बनाई जिससे अपना गांव छोड़कर अन्यत्र जाने वाले पूरे परिवार का पंजीयन उसके गृह ग्राम में रहे।