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खिलाने वाले तो जान गए खाना कहां देना है, खाने वालों को कौन और कैसे बताएगा

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बिलासपुर, 25 अप्रैल 2026। 
देश की सर्वोच्च अदालत ने मानवाधिकार के तहत पशु पक्षियों के अधिकार को भी समाहित किया है। यही कारण है कि समय-समय पर उनके हितों के लिए आदेश दिए जाते हैं। सर्वोच्च न्यायालय का एक चर्चित आदेश कुत्तों को सार्वजनिक स्थान पर खाना खिलाने के संदर्भ में है। कहां गया कि स्थानीय निकाय कुत्तों को खाना खिलाने का स्थान निर्धारित करें.... पर इसी निर्देश के चलते बिलासपुर नगर पालिक निगम ने राजेंद्र नगर चौक स्थित एक स्थान को कुत्तों के खाना खिलाने के लिए आरक्षित कर दिया है। 
एक स्थानीय दैनिक अखबार में आज इस आशय की सूचना भी छपी है अब सवाल उठता है कि खिलाने वालों को तो सूचना पढ़ कर पता चल गया जीने खाना है उसे कैसे पता चलेगा और किसी भी प्रजाति का कुत्ता हो उसे इतना ज्ञान नहीं हो सकता की वह अपना मोहल्ला छोड़कर राजेंद्र नगर चौक खाना खाने आए। पर क्या करें आदेश देने वाले और उसे लागू करने वाली प्रशासनिक व्यवस्था के नौकरशाह बगैर सामान्य बुद्धि का उपयोग करें सूचना पर हस्ताक्षर करते हैं। हम चाहे तो इस मसले पर लंबा चौड़ा व्यंग लिख सकते हैं। पुणे साहबों की सूची भी डाल सकते हैं जिनके लाडले पशु छत्तीसगढ़ भवन के एक कमरे में अलग से रुकते थे सब अलग कमरे में रुकते थे। पर यह मामला तो आवारा पशुओं का है और केवल कुत्तों के लिए है। शायद अन्य आवारा पशुओं को कहीं भी अलग से खिलाने पर कोई रोक नहीं है। जबकि हमारी संस्कृति में तो कुत्ते को बहुत ऊंचा दर्जा प्राप्त है वह महाराज युधिष्ठिर को स्वर्ग के दरवाजे तक छोड़कर आया था।